ओएमएसएस के तहत 4 दिसम्बर से 1 लाख टन गेहूं की बिक्री शुरू होने की संभावना

02-Dec-2024 01:11 PM

नई दिल्ली । खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत एक लाख टन गेहूं की बिक्री के लिए 4 दिसम्बर 2024 को पहली साप्ताहिक  ई-नीलामी शुरू होने की संभावना है।

इसके अंतर्गत कर्नाटक, बिहार, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान तथा महाराष्ट्र जैसे राज्यों के लिए 5-5 हजार टन गेहूं की मात्रा का ऑफर दिया जाएगा। 

लेकिन गेहूं की बिक्री के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने इस बार नया नियम लागू किया है जिसका उद्देश्य केवल वास्तविक जरूरतमंद फ्लोर मिलर्स एवं प्रोसेसर्स को ही इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

यदि किसी मिलर-प्रोसेसर के पास गेहूं का अत्यधिक अधिशेष स्टॉक पहले से ही मौजूद है तो उसे टेंडर की प्रक्रिया के बाहर रखा जा सकता है। कई मिलर्स में गहरा असंतोष उत्पन्न हो गया है।

उसका कहना है कि खाद्य निगम का यह नियम उन कुछेक प्राइवेट पार्टियों के लिए 'ईनाम' है जो खुले बाजार से इसकी खरीद से बच जाएंगे। 

खाद्य निगम ने अन्य राज्यों के लिए भी गेहूं की बिक्री का कोटा आवंटित किया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश के लिए 14 हजार टन, पंजाब के लिए 12,500 टन, पश्चिम बंगाल के लिए 7 हजार टन, आसाम के लिए 6500 टन, दिल्ली के लिए 5500 टन, मध्य प्रदेश के लिए 4 हजार टन, झारखंड के लिए 3 हजार टन तमिलनाडु के लिए भी 3 हजार टन की बिक्री का ऑफर शामिल है। 

फ्लोर मिलिंग सेक्टर के जानकारों का कहना है कि जहां तक गेहूं की उपब्धता का सवाल है तो इसकी कोई खास समस्या नहीं है और इसलिए केवल मूल्य ही ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में मिलर्स को निर्णय लेना है कि सरकारी गेहूं की खरीद की जाए या नहीं।

ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार उन मिलर्स को पुरस्कृत कर रही है जो अपनी प्रोसेसिंग जरूरतों की पूर्ति के लिए पहले गेहूं के स्टॉक का इंतजाम नहीं कर सके और अब भी बाजार से इसकी खरीद के लिए तैयार नहीं हैं।

उसे खाद्य निगम के गेहूं का ही आसरा है। नए नियम के अनुसार प्रत्येक बिडर को शपथ पत्र जमा करना होगा कि उसके पास मासिक प्रोसेसिंग क्षमता से ज्यादा गेहूं का स्टॉक मौजूद नहीं है और न ही वह इस स्टॉक से अधिक गेहूं का उठाव करेगा।