ओणम एवं गणेश चतुर्थी की वजह से नारियल के दाम में भारी उछाल
08-Sep-2025 12:58 PM
कोच्चि। विभिन्न कारणों से आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल होने तथा मांग एवं खपत में इजाफा होने से पिछले दो साल के अंदर नारियल का बाजार भाव 15-20 रुपए से उछलकर 80-100 रुपए के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया। दक्षिण भारत में जलवायु परिवर्तन एवं कीड़ों-रोगों के आघात से नारियल के दाम में जोरदार उछाल आने से कोपरा तथा नारियल तेल की कीमतों में भी रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।
आपूर्ति श्रृंखला में अवरोध उत्पन्न होने से 2020-21 के कोरोना काल में टेंडर (अपिरपक्व) नारियल की बिक्री बहुत घट गई जिससे इसके दाने जरूरत से ज्यादा मैच्योर हो गए और इसलिए 2022-23 के सीजन में उसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बहुत बढ़ जाने से ज्यादा मैच्योर हो गए और इसलिए 2022-23 के सीजन में उसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बहुत बढ़ जाने से कीमतों में जोरदार गिरावट आ गई।
इससे उत्पादकों को काफी घाटा हुआ और उन्होंने नारियल बागानों की देखभाल पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। वर्ष 2023 में मूल्य घटने के बाद उत्पादकों ने नारियल की प्लांटिंग बंद कर दी। परम्परागत पेड़ लम्बे होते हैं और उस पर 5 से 8 वर्ष में नारियल के फल लगने शुरू होते है जबकि हाइब्रिड नारियल पेड़ में तीन वर्ष में ही दाने लगने लगते हैं।
2024-25 के दौरान कीड़ों-रोगों के प्रकोप से कर्नाटक के टुंकुर, मांड्या, हासन, चित्रदुर्ग एवं चिकमगलूर में 30 प्रतिशत नारियल की फसल बर्बाद हो गई।
इसी तरह आंध्र प्रदेश में समुद्री तूफान एवं बिमारियों से 25 प्रतिशत फसल क्षतिग्रस्त हो गई। तमिलनाडु में भी कृष्णागिरी एवं तिरुनेलवेली में रूट विल्ट रोग तथा सफेद मक्खी के प्रकोप से नारियल की 40 प्रतिशत बागान को नुकसान हुआ।
गणेश चतुर्थी एवं ओणम पर्व की जबरदस्त मांग के कारण नारियल, कोपरा एवं तेल का दाम बेतहाशा बढ़ गया। नारियल का नया माल मंडियों से गायब हो गया। विभिन्न राज्यों में इसकी आपूर्ति सही ढंग से नहीं हो पाई।
इंडोनेशिया फिलीपींस, थाईलैंड एवं श्रीलंका में भी उत्पादन कमजोर रहा। गोवा में कर्नाटक से 75 हजार नग नारियल मंगाया गया और कुछ ही घंटों में इसकी पूरी बिक्री हो गई।
