पांच वर्षों में चीनी की संस्थागत खपत 10 प्रतिशत बढ़ी

16-Sep-2025 04:04 PM

नई दिल्ली। शीर्ष उद्योग संस्था- इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) की एक अध्ययन रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले पांच साल के दौरान भारत में चीनी की औद्योगिक या संस्थागत मांग एवं खपत में 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

इसमें गैर अल्कोहलिक पेय पदार्थ (कोल्ड ड्रिंक्स आदि), मिष्टान, बेकरी, बिस्कुट, डेयरी उत्पाद, आइस क्रीम तथा अन्य प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद आदि शामिल हैं जिसमें चीनी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है। 

इस्मा की अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार चीनी की कुल घरेलू खपत में औद्योगिक क्षेत्र की भागीदारी 2018-19 के सीजन में 50-55 प्रतिशत थी जो 2023-24 के सीजन में बढ़कर 60-65 प्रतिशत पर पहुंच गई। दूसरी ओर प्रत्यक्ष खाद्य उद्देश्य के साथ-साथ अन्य उद्देश्यों में चीनी खपत की भागीदारी 45-50 प्रतिशत से घटकर 35-40 प्रतिशत पर आ गई।

इस्मा की इस रिपोर्ट को तैयार करने प्रमुख एफएमसीजी एवं अन्य खाद्य पदार्थ निर्माता कंपनियों के आंकड़े का उपयोग किया गया। इसमें ब्रिटानिया, पारले, नेस्ले, कोका कोला, मोंडेलेज तथा अमूल जैसी दिग्गज कंपनियां भी शामिल हैं।

इस रिपोर्ट से स्पष्ट संकेत मिलता है कि चीनी के इस्तेमाल से निर्मित प्रोसेस्ड खाद्य उत्पादों की खपत तेजी से बढ़ रही है। सिर्फ शहरी क्षेत्र के मिडल क्लास वाले उपभोक्ता ही नहीं बल्कि ग्रामीण एवं कस्बाई इलाकों के समृद्ध लोग भी इन उत्पादों की खपत बढ़ाने में अच्छा योगदान दे रहे हैं। 

देश में लगभग 3 करोड़ समृद्ध परिवारः हैं और उसमें रिफाइंड चीनी की प्रत्यक्ष खपत में कुछ कमी आई है। दूसरी ओर वहां परम्परागत मीठी वस्तु एवं उसके विकल्पों की खपत बढ़ रही है।

इसके मुकाबले देश के 20.50 करोड़ कम आमदनी वाले परिवारों में ब्रांडेड चीनी की खपत के प्रति आकर्षण घटा है जबकि ऐसे परिवार परम्परागत मीठी वस्तु जैसे गुड़-शक्कर का उपयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार मध्यम आय वर्ग के करीब 7 करोड़ परिवारों के दैनिक भोजन में रिफाइंड चीनी की भारी खपत का सिलसिला बरकरार है और वे गुड़-शक्कर का उपयोग कम कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2030 तक ब्रांडेड चीनी के उपयोग में धीरे-धीरे बढ़ोत्तरी होने तथा खपत की प्राथमिकता में बदलाव आने की उम्मीद है।