पहली तिमाही में भारत से काजू का निर्यात 8 प्रतिशत बढ़ा

10-Apr-2025 01:50 PM

मुम्बई। यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में मजबूत मांग का सहारा मिलने से चालू वर्ष की पहली तिमाही  भारत से प्रसंस्कृत काजू के निर्यात में 8 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। वैसे यूरोपीय संघ में लगभग 72 प्रतिशत काजू का आयात वियतनाम से किया गया क्योंकि यह अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर उपलब्ध था।

जनवरी-मार्च 2025 की तिमाही आयात वियतनाम से किया गया क्योंकि यह अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर उपलब्ध था। जनवरी-मार्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जिसकी कीमत 27.30 करोड़ यूरो या 30 करोड़ डॉलर आंकी गई। वर्ष 2024 की समान अवधि के मुकाबले वहां काजू के आयात में मात्रा एवं मूल्य की दृष्टि से भारी इजाफा हुआ।

जनवरी-मार्च 2024 के दौरान यूरोपीय संघ में 1930 करोड़ यूरो अथवा 21.20 करोड़ डॉलर मूल्य के 37,054 टन काजू का आयात हुआ था। इस तरह काजू के आयात में 16 प्रतिशत तथा मूल्य में 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 

एक अग्रणी व्यापार विश्लेषक एवं निर्यातक के अनुसार अमरीका की नई टैरिफ नीति से वैश्विक काजू बाजार प्रभावित होने की संभावना है। अमरीका वियतनामी काजू का प्रमुख बाजार है मगर वहां इस पर 46 प्रतिशत का भारी-भरकम आयात शुल्क लगा दिया गया है जो भारतीय काजू पर लागू 26 प्रतिशत के सीमा शुल्क से बहुत ज्यादा है।

इसके फलस्वरूप वियतनाम को अब यूरोपीय संघ, मध्य पूर्व एशिया तथा जापान जैसे बाजारों में अपने काजू का निर्यात बढ़ाने का जोरदार प्रयास करना होगा। अमरीका के विशाल बाजार में भागीदारी घटना वियतनाम के लिए काफी घातक साबित होगा। 

भारत अमरीकी बाजार में मिलने वाले शानदार अवसर का कितना फायदा उठा पाता है यह देखना दिलचस्प होगा। हालांकि वियतनाम की भांति भारत भी काजू का अग्रणी उत्पादक देश है मगर यहां उत्पादित काजू के अधिकांश भाग की खपत घरेलू प्रभाग में हो जाती है और निर्यात के लिए सीमित स्टॉक उपलब्ध रहता है।

इसके अलावा क्वालिटी बेहतर होने के कारण भारतीय काजू का दाम भी ऊंचा  रहता है। भारत संसार में काजू का सबसे प्रमुख खपतकर्ता देश है। 

यूरोपीय संघ और वियतनाम के बीच मुक्त व्यापार समझौता होने से वियतनामी काजू के उत्पादकों एवं निर्यातकों को राहत मिलेगी।

वैसे यूरोपीय संघ में कुछ ऐसे सदस्य देश हैं जहां उच्च क्वालिटी के काजू की भारी मांग रहती है और उसे भारतीय प्रोसेसर्स ही पूरा कर सकते हैं। वियतनाम में इतनी ऊंची क्वालिटी के काजू का उत्पादन बहुत कम होता है।