पहली तिमाही में उड़द का आयात गत वर्ष से कुछ कम
18-Jul-2025 01:22 PM
चेन्नई। घरेलू बाजार भाव कुछ नरम पड़ने के बावजूद भारत में उड़द का अच्छा खासा आयात हो रहा है और म्यांमार इसका प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश बना हुआ है। इसके अलावा ब्राजील से भी इसका थोड़ा बहुत आयात होता है।
केन्द्र सरकार ने उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2024-25 सीजन के 7400 रुपए प्रति क्विंटल से 400 रुपए बढ़ाकर 7800 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। खरीफ कालीन उड़द की बिजाई देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में जोर-शोर से हो रही है।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यानी अप्रैल-जून 2025 के दौरान देश में 1,92,119 टन उड़द का आयात होने का अनुमान है जो अप्रैल-जून 2024 की तिमाही के आयात 1,99,859 टन से 7740 टन कम है। समीक्षाधीन वर्ष के दौरान उड़द का आयात अप्रैल में 55,436 टन से उछलकर 98,798 टन पर पहुंच गया लेकिन मई में 77,775 टन से गिरकर 51,604 टन तथा जून में 66,649 टन से घटकर 41,717 टन पर अटक जाने का अनुमान है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 की सम्पूर्ण अवधि (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत में उड़द का आयात तेजी से बढ़कर 8,20,257 टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जबकि इससे पूर्व देश में 2023-24 के दौरान 6,24,222 टन, 2022-23 में 5,24,813 टन तथा 2021-22 में 6,11,611 टन उड़द का आयात हुआ था। इससे पहले देश में उड़द के आयात के लिए वार्षिक कोटा प्रणाली लागू थी और इसके तहत वित्त वर्ष 2020-21 में 3,44,790 टन तथा 2019-20 में 3,12,078 टन उड़द का आयात हुआ था।
सरकार ने तुवर एवं पीली मटर की भांति उड़द के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को भी 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया है। म्यांमार में इसका बेहतर उत्पादन हुआ है और वहां इसका अच्छा खासा निर्यात योग्य स्टॉक मौजूद है। इससे भारतीय आयातकों को वहां से इसे मंगाने में कोई कठिनाई नहीं हो रही है। उड़द का सर्वाधिक आयात चेन्नई बंदरगाह पर किया जाता है।
