पंजाब के मालवा संभाग में कीड़ों के प्रकोप से किसान गेहूं की दोबारा बिजाई के लिए विवश
02-Dec-2024 03:29 PM
भटिंडा । पंजाब के मालवा संभव में पटियाला, बरनाला, मनसा, भटिंडा एवं संगरूर सहित अन्य जिलों में गुलाबी तना छेदक कीट का भयंकर प्रकोप होने से किसानों की चिंता एवं परेशानी काफी बढ़ गई है।
इसके फस्वरूप उसे गेहूं की दोबारा बिजाई करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। इस बार पंजाब के कुछ जिलों में धान की उपज दर कम होने से किसानों को पहले ही घाटा हो चुका है जबकि अब गेहूं की खेती पर खर्च में बढ़ोत्तरी हो रही है क्योंकि इसकी दोबारा बिजाई करनी पड़ रही है।
समझा जाता है कि धान की कटाई के बाद जिन खेतों में पराली बाकी रह गई वहां इस कीट (मोथ) का प्रकोप बना रहा। केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न का सर्वाधिक योगदान देने वाले राज्य- पंजाब के प्रभावित किसानों ने सरकार से इस नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा (क्षतिपूर्ति) देने की मांग करते हुए कहा है कि उसे गेहूं का बीज और डीएपी उर्वरक की खरीद दोबारा करनी पड़ेगी।
धान के पौधे का अवशेष जहां पड़ा रह गया वहां कीट भी मौजूद रहा और धीरे-धीरे यह अन्य खेतों में फैलने लगा। पटियाला के किसानों ने पराली को जलाए बगैर इसका प्रबंधन करके सुपर सीडर की सहायता से गेहूं की बोआई की थी जो कृषि विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिए गए निर्देश के अनुरूप थी लेकिन इस फसल में कीड़ें लग गए।
संगरूर जिले में भी पराली के अवशेष की वजह से मोथ कीट का प्रकोप फैला है। जिन खेतों में गेहूं की बिजाई से पूर्व पराली को जला दिया गया वहां कीड़ों का प्रकोप नहीं देखा जा रहा है।
सरकार के कहने पर पराली के इन-सीटू प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर का इस्तेमाल किया गया यकीन फिर भी फसल पर कीड़ों का आघात काफी बढ़ गया।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जैसे ही तापमान में गिरावट आएगी वैसे ही इस कीट का प्रभाव भी खत्म होता जाएगा इसलिए फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है। यह कीट आमतौर पर धान के खेतों में देखा जाता है मगर इस बार गेहूं की फसल पर भी देखा जा रहा है।
