पंजाब में एक बार फिर कपास के बिजाई क्षेत्र में कमी आने की संभावना
19-Apr-2025 01:11 PM
भटिंडा। हालांकि पिछले सीजन के दौरान पंजाब में कपास की फसल पर पिंक बॉलवर्म कीट के प्रकोप पर नजर रखने तथा उसे नियंत्रित करने हेतु एक पायलट प्रोजेक्ट आरंभ किया गया था और इसके फलस्वरूप वहां कीट के प्रकोप में कुछ कमी आने की सूचना भी मिली थी
लेकिन अधिकांश किसानों की इस सम्बन्ध में मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ उत्पादकों की शिकायत है कि इस प्रोजेक्ट से कीट के प्रकोप को नियंत्रित करने में कोई खास सहायता नहीं मिली और उसे काफी घाटा हो गया।
अनेक किसान इस बार कपास की खेती छोड़ने या उसको घटाने का प्लान बन रहे हैं क्योंकि एक तो पिंक बॉलवर्म कीट का खतरा बना हुआ है और दूसरे, पंजाब में पानी का अभाव भी महसूस किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान के कुछ भागों में कपास की अगैती खेती होती है और इसकी बिजाई की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है।
किसानों के अनुसार यद्यपि ए आई से संचालित प्रोजेक्ट के तहत मशीन से कपास की फसल पर पिंक बॉलवर्म के खतरे की जानकारी सही समय पर प्राप्त करना संभव हो गया लेकिन रसायनों (कीटनाशकों) के छिड़काव के बावजूद कीट को नियंत्रित करने में सफलता नहीं मिल सकी।
इसे देखते हुए किसान खासकर उन इलाकों में कपास का क्षेत्रफल घटाना चाहते हैं जहां इस कीट का प्रकोप ज्यादा रहता है। पानी के अभाव एवं कीड़ों-रोगों के प्रकोप से राज्य के विभिन्न उत्पादक जिलों में रूई की औसत उपज दर में भारी गिरावट आ रही है और इसकी क्वालिटी भी प्रभावित हो रही है जिससे किसानों की आमदनी घटती जा रही है।
पंजाब में मालवा संभाग के आठ जिलों में कपास की खेती होती है मगर अधिकांश उत्पादन चार जिलों में होता है जिसमें मनसा और भटिंडा भी शामिल है।
मुक्तसर, फरीदकोट एवं फाजिल्का-अबोहर में भी इसकी पैदावार होती है। 2024-25 के सीजन में पंजाब में कपास का बिजाई क्षेत्र घटकर 97 हजार हेक्टेयर तथा उत्पादन गिरकर 2.72 लाख गांठ पर अटक गया।
