पंजाब में जीएम मक्का का फील्ड ट्रायल आरंभ करने का निर्णय

18-Jul-2025 05:10 PM

चंडीगढ़। पर्यावरण संस्थान संगठनों एवं एंटी- जीएम कार्यकर्ताओं के जोरदार विरोध के बावजूद पंजाब सरकार ने राज्य में जीएम मक्का के फील्ड ट्रायल की स्वीकृति देने का फैसला किया है। लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्विद्यालय (पीएयू) द्वारा वर्तमान खरीफ सीजन में जीएम श्रेणी के मक्का का 'खेतों' में परीक्षण' (फील्ड ट्रायल) किया जा रहा है।  

पंजाब के कृषि मंत्री का कहना है कि पीएयू जीएम मक्का पर अनुसंधान तथा फील्ड ट्रायल जारी रख रहा है और भविष्य की चुनौतियों का सफलता पूर्वक सामना करने के लिए इस तरह की किस्मों का विकास करना आवश्यक है।

उनका कहना था कि मक्का कपास की अपेक्षा एक बेहतर विकल्प है क्योंकि इसमें पानी का कम उपयोग किया जाता है। जिन इलाकों में पानी का अभाव है वहां किसानों के लिए मक्का का उत्पादन काफी लाभदयक साबित हो सकता है। कृषि मंत्री के अनुसार फील्ड ट्रायल के विरोध के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

लेकिन जीएम मुक्त भारत की वकालत करने वाले संगठन के नेतृत्व में एंटी जीएम कार्यकर्ताओं ने पीएयू द्वारा जीएम मक्का के लिए फील्ड ट्रायल के संचालन का जोरदार विरोध किया है। इन कार्यकर्ताओं (एक्टीविस्ट्स) का कहना है कि इस तरह का परीक्षण काफी जोखिमपूर्ण साबित हो सकता है और इसलिए इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जानी चाहिए। 

जीएम फ्री इंडिया संगठन के एक अग्रणी सदस्य का कहना है कि पंजाब सरकार ने एक तरफ ग्लायफोसेट पर प्रतिबंध लगा रखा है तो दूसरी ओर पीएयू को फील्ड ट्रायल के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र भी दे दिया है जबकि उसमें इसी कीटनाशक का उपयोग किया जा रहा है तो फिर जीएम मक्का के फील्ड ट्रायल की अनुमति कैसे दी जा सकती है। हर्बीसाइड टोलरेंट मक्का का फील्ड ट्रायल राज्य सरकार की अपनी मौजूद नीति का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन है।

विशेषज्ञों के मुताबिक प्रत्येक हाइब्रिड उत्पादों के साथ कुछ वर्षों के बाद कीड़ों-रोगों की समस्या शुरू हो जाती है और इसलिए नई प्रजातियों (किस्मों) के विकास की जरूरत पड़ती है। फील्ड ट्रायल की अनुमति देकर पंजाब सरकार ने पीएयू का आत्मविश्वास घटाने का काम किया है।