पीली मटर का शुल्क मुक्त आयात जारी रहने से कृषि मंत्री चिंतित
29-Aug-2025 11:16 AM
नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने पीली मटर का शुल्क मुक्त आयात जारी रहने पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे घरेलू दाल दलहन बाजार में कीमतों पर गहरा प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ज्ञात हो कि चना के एक बेहतर विकल्प के तौर पर पीली मटर का आयात किया जा रहा है।
कृषि मंत्री ने पीली मटर के आयात पर 50 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाने के लिए कहा है। हाल ही में केन्द्रीय खाद्य मंत्री को भेजे एक पत्र में कृषि मंत्री ने कहा था कि पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात से घरेलू बाजार में दाल- दलहन की कीमतों में काफी गिरावट आ गई है जिससे किसानों को दलहनों का बिजाई क्षेत्र बढ़ाने का समुचित प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है विदेशों से आयातित शुल्क मुक्त पीली मटर ने दलहन बाजार को सुस्त कर दिया है।
कृषि मंत्री के अनुसार भारत में फिलहाल पीली मटर का आयात खर्च 3351 रुपए प्रति क्विंटल बैठ रहा है जो अन्य सभी प्रमुख दलहनों- तुवर, उड़द, मसूर, चना एवं मूंग आदि के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से बहुत पीछे और इसके थोक मंडी भाव से काफी कम है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार वर्तमान समय में रूस तथा कनाडा 355-360 डॉलर प्रति टन की दर से जिस पीली मटर का आयात हो रहा है उसका उपयोग मुख्यतः बेसन बनाने में किया जा रहा है। इस बेसन से सनैक्स आदि बनता है।
इसके फलस्वरूप बेसन निर्माण में चना की मांग कमजोर पड़ती जा रही है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2024-25 के सीजन में चना का घरेलू उत्पादन 113.30 लाख टन आंका है। देश में दलहनों के कुल उत्पादन में चना का योगदान करीब 50 प्रतिशत रहता है।
कृषि मंत्री के मुताबिक यह मानने का पर्याप्त कारण मौजूद है कि सस्ते दाम पर पीली मटर का विशाल आयात होने से अन्य दलहनों (दालों) के साथ इसकी बड़े पैमाने पर मिलावट की जाती है और उसकी कीमतों में भी भारी नरमी आ रही है।
