पीली मटर के विशाल आयात से दलहनों के दाम पर दबाव
01-Mar-2025 03:52 PM
मुम्बई। एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) का कहना है कि पिछले एक साल से अधिक समय के दौरान देश में पीली मटर का विशाल आयात (डम्पिंग) होने के कारण चना सहित अन्य दलहनों की कीमतों में भारी गिरावट आ गई।
सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विदेशों से आयातित दलहनों का दाम औसत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कभी नीचे न आए क्योंकि इससे भारतीय किसानों को नुकसान होगा।
एसोसिएशन के मुताबिक भारत में दलहनों का एमएसपी 56 रुपए से लेकर 85 रुपए प्रति किलो के बीच निर्धारित है। वर्ष 2024 के दौरान देश में लगभग 67 लाख टन दलहनों का रिकॉर्ड आयात हुआ जिसमें अकेले पीली मटर की भागीदारी 30 लाख टन के करीब रही।
पीली मटर का आयात मुख्यत: कनाडा एवं रूस से किया गया और इसका आयात मूल्य फरवरी में 32 से 35 रुपए प्रति किलो के बीच दर्ज किया गया।
इससे निर्मित दाल का दाम भी 40 रुपए प्रति किलो के आसपास रहा जबकि अन्य दालों का भाव खुदरा बाजार में 90 से 160 रुपए प्रति किलो के बीच दर्ज किया गया।
रबी सीजन की नई फसल की आवक शुरू होने के कारण चना का थोक मंडी भाव महाराष्ट्र में घटकर 5200-5350 रुपए प्रति क्विंटल के बीच आ गया है जो 2024-25 सीजन के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य 5650 रुपए प्रति क्विंटल से नीचे है।
राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं कर्नाटक सहित अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों में चना की जोरदार आवक अगले कुछ सप्ताहों में आरंभ होने की उम्मीद है।
कृषि मंत्रालय ने इस वर्ष 17 लाख टन चना एवं मसूर की खरीद की मंजूरी दी है। इसकी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाएगी।
2023-24 सीजन के दौरान चना की पैदावार 10 प्रतिशत घटकर 110.30 लाख टन रह जाने के कारण दलहनों का सकल उत्पादन भी 7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 242.40 लाख टन पर अटक गया। उद्योग-व्यापार क्षेत्र का चना उत्पादन अनुमान का आंकड़ा इसके छोटा रहा था।
