पीली मटर पर आयात शुल्क लगाने पर फैसला शीघ्र

03-Mar-2025 06:00 PM

नई दिल्ली। हालांकि 28 फरवरी तक कोई सरकारी अधिसूचना जारी नहीं होने से पीली मटर के लिए शुल्क मुक्त आयात की अवधि समाप्त हो गई और अब केवल 28 फरवरी से पूर्व के बिल ऑफ लेडिंग वाले माल का आयात ही 31 मार्च 2025 तक किया जा सकेगा

लेकिन एक मंत्रिस्तरीय पैनल 4 मार्च को होने वाली मीटिंग में यह निर्णय लेगा कि पीली मटर पर कितना आयात शुल्क लगाया जाए अथवा इसके शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को नए ढंग से निर्धारित किया जाए।

उल्लेखनीय है कि चना के एक विकल्प के तौर पर पीली मटर की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से पहली बार 8 दिसम्बर 2023 को पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की स्वीकृति दी गई थी और बाद में इसकी समय सीमा बढ़ाई गई। 

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार आयात को हतोत्साहित करने के लिए सरकार पीली मटर पर ऊंचे स्तर का सीमा शुल्क लगा सकती है क्योंकि इसका विशाल आयात होने से घरेलू बाजार में सभी दलहनों का भाव अपने शीर्ष स्तर की तुलना में घटकर काफी नीचे आ गया।

तुवर, चना तथा मसूर का दाम तो सरकारी समर्थन मूल्य से भी नीचे आ गया है। चना तथा मसूर के साथ-साथ मटर की नई फसल की आवक भी शीघ्र ही जोर पकड़ने की संभावना है जिससे इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। 

तुवर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा पहले ही एक साल बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक नियत की जा चुकी है। देसी चना, उड़द एवं मसूर के शुल्क मुक्त आयात की अवधि 31 मार्च 2025 को समाप्त हो रही है और अभी तक इसे आगे बढ़ाने के लिए कोई सरकारी अधिसूचना जारी नहीं हुई है।

ऐसा लगता है कि उड़द एवं मसूर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा आगे बढ़ाई जा सकती है मगर देसी चना के बारे में कुछ संदेह है।

मूंग का आयात वर्ष 2022 से ही प्रतिबंधित है। दरअसल ब्राजील जैसे देशों से उड़द कारोबार बढ़ाने का प्रयास हो रहा है इसलिए सरकार को इसके सोच समझकर निर्णय लेना होगा।

मटर पर वर्ष 2017 में 60 प्रतिशत का बुनियादी आयात शुल्क लगाया गया था जबकि देसी चना पर शुल्क की दर 50 प्रतिशत नियत की गई थी।  

वर्ष 2024 में देश के अंदर 50 लाख टन से अधिक पीली मटर का आयात हो गया। इसका भाव नीचे रहने से इसकी मांग एवं खपत बढ़ गई। इसके फलस्वरूप अन्य दलहनों का दाम घट गया।