पाम तेल का भाव ऊंचा होने से भारत में बढ़ रहा है सोया, सूरजमुखी तेल का आयात
07-Feb-2025 06:21 PM
मुम्बई । चूंकि पिछले चार-पांच महीनों से सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल जैसे सॉफ्ट तेलों के मुकाबले पाम तेल का भाव काफी ऊंचा चल रहा है इसलिए भारत में सॉफ्ट तेलों के आयात की भागीदारी बढ़ने तथा पाम तेल की हिस्सेदारी घटने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।
पाम तेल के आयात पर रिफाइनर्स का मार्जिन ऋणात्मक हो गया है और भारतीय उपभोक्ता भी इसके विकल्प के तौर पर सोयाबीन तेल तथा सूरजमुखी तेल की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं।
सितम्बर 2024 में सरकार द्वारा खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में 22 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी जिससे आयात खर्च बढ़ गया है।
जहां तक पाम तेल का सवाल है तो इंडोनेशिया एवं मलेशिया जैसे शीर्ष उत्पादक एवं निर्यातक देशों में इसकी आपूर्ति की समस्या भी बढ़ रही है।
इंडोनेशिया में बायोडीजल के निर्माण में पाम तेल की विशाल मात्रा का इस्तेमाल हो रहा है जबकि मलेशिय में वर्ष 2024 के दौरान उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोत्तरी नहीं हो सकी। इससे निर्यात योग्य स्टॉक घट गया।
एक अग्रणी प्रतिष्ठान के अनुसार पाम तेल की कीमतों में हुई बढ़ोत्तरी के कारण घरेलू उपभोक्ताओं का ध्यान अन्य खाद्य तेलों की ओर बढ़ गया है।
देश में सूरजमुखी तेल के सबसे प्रमुख आयातक प्रतिष्ठान का कहना है कि फिलहाल पाम तेल से अन्य खाद्य तेलों की तरफ रुझान की गति धीमी है लेकिन आगे यह तेज हो सकती है क्योंकि निकट भविष्य में पाम तेल की कीमतों में ज्यादा नरमी आने की उम्मीद नहीं है।
उल्लेखनीय है कि भारत में करीब 30-35 प्रतिशत पाम तेल का उपयोग उपभोक्ताओं के रसोईघर में होता है जबकि 60-65 प्रतिशत भाग का इस्तेमाल होरेका (होटल, रेस्टोरेंट्स एवं कैटरिंग) क्षेत्र तथा खाद्य उत्पाद निर्माण क्षेत्र में किया जाता है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार पिछले 4-6 महीनों के दौरान पाम तेल के दाम में करीब 30 प्रतिशत तथा सूरजमुखी के मूल्य में लगभग 25 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
सूरजमुखी तेल की मांग एवं खपत में नियमित रूप से बढ़ोत्तरी हो रही है जबकि पाम तेल की मांग कमजोर पड़ गई है।
मुम्बई में आयातित आरबीडी पामोलीन का खर्च 1090 डॉलर प्रति टन तथा क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का 1145 डॉलर प्रति टन बैठ रहा है जबकि सोयाबीन तेल का आयात खर्च 1086 डॉलर प्रति टन और सूरजमुखी तेल का आयात खर्च 1180 डॉलर प्रति टन बताया जा रहा है।
महंगा होने के कारण नवम्बर-दिसम्बर 2024 के दौरान पाम तेल के आयात में गिरावट दर्ज की गई जबकि वनस्पति तेल का कुल आयात 16 प्रतिशत टन पर अटक गया जबकि सॉफ्ट तेलों का आयात 6.92 लाख टन से दोगुने से ज्यादा उछलकर 14.33 लाख टन से ऊपर पहुंच गया।
