प्राइवेट क्षेत्र की ज्यादा लिवाली से गेहूं की सरकारी खरीद हुई प्रभावित

27-May-2025 04:30 PM

नई दिल्ली। इसमें कोई संदेह नहीं कि वर्ष 2025 के दौरान गेहूं की सरकारी खरीद 2021 के बाद सबसे ज्यादा रही है लेकिन फिर भी नियत लक्ष्य से काफी पीछे रह गई क्योंकि इस बार प्राइवेट खरीदारों ने किसानों से इसकी जमकर खरीदारी की है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पिछले तीन साल की भांति इस वर्ष भी गेहूं की खरीद नियत लक्ष्य (333 लाख टन) से पीछे रह जाएगी। 

गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) इस बार 2425 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है जबकि फ्लोर मिलर्स, प्रोसेसर्स एवं व्यापारियों द्वारा इससे ऊंचे दाम पर किसानों से भारी मात्रा में गेहूं खरीद किया गया।

प्राइवेट खरीदारों की एक खासियत यह रही कि उन्होंने किसानों को किस्तों में गेहूं के मूल्य का भुगतान किया। पहले बिजाई के समय किसानों की आर्थिक सहायता की गई, उसके बाद दीपावली के अवसर पर पैसे दिए गए और फिर जब गेहूं की आपूर्ति की गई तब शेष बकाया राशि का भुगतान किया गया। दूसरी ओर सरकारी एजेंसियां केवल खरीद के बाद ही किसानों को एमएसपी का भुगतान करती रहीं।

केन्द्रीय खाद्य सचिव के अनुसार वर्तमान रबी मार्केटिंग सीजन में गेहूं की कुल सरकारी खरीद बढ़कर 300 लाख टन के आसपास पहुंच जाने की उम्मीद है। पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश में खरीद की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है जबकि राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश में यह अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।

अन्य प्रांतों में भी खरीद नहीं या नगण्य हो रही है। इसके फलस्वरूप गेहूं की सरकारी खरीद में अब ज्यादा सुधार आने के आसार नहीं हैं। इस बात का अंदाजा पहले से ही था कि वर्ष 2025 में गेहूं की कुल सरकारी खरीद 300 लाख टन के आंकड़े को पार नहीं कर पाएगी। 

25 मई 2025 तक 297 लाख टन से कुछ अधिक गेहूं की सरकारी खरीद हुई जो संशोधित लक्ष्य की करीब 89 प्रतिशत है। पिछले साल कुल मिलाकर केन्द्रीय पूल के लिए 266 लाख टन गेहूं खरीदा गया था जिसके मुकाबले इस बार 12 प्रतिशत अधिक खरीद हुई है।

इससे पूर्व वर्ष 2023 में 262 लाख टन तथा 2022 में 188 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। खाद्य सचिव के अनुसार उत्तर प्रदेश एवं पंजाब में खरीद बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन प्राइवेट खरीदारों की जोरदार लिवाली से समीकरण बिगड़ गया। इन खरीदारों के पास गेहूं का बहुत कम स्टॉक बचा हुआ था क्योंकि गत वर्ष उसे ज्यादा खरीद का मौका नहीं मिल पाया था।