प्रतिस्पर्धी कीमत के कारण अमरीका से भारत में रूई का निर्यात बढ़ा
17-Apr-2025 07:48 PM
न्यूयार्क। पिछले कुछ महीनों के दौरान अमरीकी अपलैंड रूई का निर्यात भारत में तेजी से बढ़ा है। इसका कारण वैश्विक स्तर पर सीमा शुल्क में अनिश्चितता एवं विवाद, अमरीकी रूई के दाम में गिरावट तथा भारत में मांग मजबूत रहना आदि बताया जा रहा है।
अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) के आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी से मध्य अप्रैल के बीच अमरीका से भारत में रूई का निर्यात बढ़कर 1,55,260 गांठ पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के शिपमेंट 25,901 गांठ से कई गुणा ज्याद है। आगामी समय के दौरान भारत में अमरीकी रूई का निर्यात और भी बढ़ने की संभावना है।
अमरीका और चीन के बीच भयंकर व्यापार युद्ध जारी है। सुनने में आ रहा है कि अमरीका ने कुछ चाइनीज उत्पादों पर 245 प्रतिशत का भारी-भरकम सीमा शुल्क लगा दिया है।
इसके जवाब में चीन ने भी अमरीकी उत्पादों पर आयात शुल्क काफी बढ़ा दिया है जिससे वहां अमरीका से रूई का आयात लगभग ठप्प पड़ गया है।
चीन परम्परागत रूप से अमरीकी रूई का प्रमुख खरीदार रहा है इसलिए चीन में आयात रुकने से अमरीका में रूई का भाव घट गया।
भारतीय आयातकों ने इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया। 20 फरवरी वाले सप्ताह के दौरान अमरीका से भारत को रूई का निर्यात बढ़कर पिछले ढाई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया।
चीन ने पहले अमरीकी उत्पादों पर 84 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी मगर बाद में इसे बढ़ाकर 125 प्रतिशत नियत कर दिया। इससे अमरीका का रूई बाजार पस्त हो गया।
अमरीकी निर्यातकों ने वैकल्पिक बाजारों की तलाश आरंभ कर दी और इस क्रम में भारत एक अच्छे विकल्प के रूप में उभरकर सामने आ रहा है।
भारत में रूई के आयात पर 11 प्रतिशत का सीमा शुल्क लागू है जिसे हटाने की सिफारिश की गई है। यदि यह हटाया गया तो देश में सस्ती अमरीकी रूई का आयात तेजी से बढ़ सकता है।
भारत स्वयं चीन के बाद दुनिया में रूई का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है जबकि कॉटन यार्न के उत्पादन एवं निर्यात में सबसे आगे है।
भारत से पहले रूई की विशाल मात्रा का निर्यात होता था लेकिन घरेलू उत्पादन में गिरावट आने से अब आयात बढ़ने लगा है।
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार 2023-24 के मार्केटिंग सीजन के दौरान देश में 15.20 लाख गांठ का आयात हुआ था जो 2024-25 में बढ़कर 33 लाख गांठ तक पहुंच सकता है।
