प्रथम सर्वे रिपोर्ट में लगभग 1100 लाख टन गेहूं के घरेलू उत्पादन का अनुमान

04-Mar-2025 05:10 PM

पंजिम। रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा गोवा में आयोजित कॉनक्लेव में यह तथ्य उभरकर सामने आया कि 2023-24 की तुलना में 2024-25 के वर्तमान रबी सीजन के दौरान भारत में गेहूं का उत्पादन 8.2 प्रतिशत बढ़ सकता है क्योंकि एक तो इसके बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई और दूसरे, किसानों ने गेहूं की ऐसी किस्मों की बोआई ज्यादा क्षेत्रफल में की जिसमें मौसम की प्रतिकूल स्थिति को सहन करने की अधिक क्षमता है। 

कॉनक्लेव में जारी प्रथम उद्योग अनुमान के अनुसार 2024-25 के मौजूदा सीजन में गेहूं का घरेलू उत्पादन बढ़कर 1098.50 लाख टन पर पहुंचने के आसार हैं जो 2023-24 सीजन के दौरान लगाए गए अनुमान 1057.90 लाख टन से 8.2 प्रतिशत अधिक है।

उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2023-24 के सीजन में 1132.90 लाख टन गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन आंका था जो उद्योग-व्यापार क्षेत्र के अनुमान से काफी ऊंचा था।

फरवरी 2025 में मौसम गर्म रहा और मार्च में भी तापमान ऊंचा रहने की संभावना है जिससे गेहूं की फसल पर आंशिक रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। 

ध्यान देने की बात है कि स्वयं फेडरेशन ने भी चालू वर्ष के दौरान 1100 लाख टन गेहूं का उत्पादन होने की संभावना व्यक्त की थी। आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान विभिन्न मंचों पर 1100 लाख टन गेहूं के उत्पादन का अनुमान व्यक्त करते रहे हैं। यदि मार्च का मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादन का यह आंकड़ा हासिल हो सकता है। 

गोवा के पंजिम में आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल व्हीट मिलिंग कॉनक्लेव- 'दि फ्यूचर ऑफ मिलिंग- विजन 2030 एंड बियॉन्ड' में एक प्रेस कांफ्रेस के दौरान रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में अच्छी वर्षा हुई है जिससे फसल को फायदा हुआ है।

ऊंचे तापमान का गेहूं की उपज दर पर ज्यादा प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना नहीं है क्योंकि जलवायु रोधी किस्मों की खेती अधिक क्षेत्रफल में की गई है।

पिछले रबी सीजन में राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं का बिजाई क्षेत्र 312 लाख हेक्टेयर रहा था जो इस बार उछलकर 328 लाख हेक्टेयर के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया।

सर्वे रिपोर्ट में गेहूं की उपज दर उत्तर प्रदेश में 2 प्रतिशत बढ़ने की उम्म्मीद जाहिर की गई लेकिन साथ ही साथ पंजाब, हरियाणा, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश में पिछले सप्ताह हुई ओलावृष्टि से फसल को क्षति पहुंचने की संभावना भी व्यक्त की गई है।