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13-Oct-2026 04:54 PM
इडुक्की। यद्यपि परम्परागत आयातकों द्वारा छोटी (हरी) इलायची की खरीद के लिए बड़े पैमाने पर पूछ परख की जा रही है लेकिन कोई बढ़ा एवं पक्का सौदा होने की सूचना नहीं मिल रही है। पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में भारत से विशाल मात्रा में इलायची का निर्यात होता है मगर वहां अशांति का माहौल है।
इससे शिपमेंट में देर हो रही है और शिपमेंट खर्च भी ऊंचा हो गया है। ईरान पहले से ही भारतीय तथा इजरायल के साथ भयंकर युद्ध में उलझा हुआ है जबकि अब यमन के हुती विद्रोहियों ने सऊदी अरब को दहलाना शुरू कर दिया है। सऊदी अरब तथा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भारतीय इलायची के दो अग्रणी आयातक देश है।
लेकिन भारतीय निर्यातक इस विषम परिस्थिति से विचलित नहीं है। ग्वाटेमाला में इस बार फसल काफी कमजोर है इसलिए खाड़ी क्षेत्र में भारतीय इलायची की मांग मजबूत बनी रहेगी। बेहतर निर्यात मांग से घरेलू बाजार में इलायची का भाव मजबूत रहने के आसार हैं।
प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में इलायची के नए माल की जोरदार तुड़ाई-तैयारी का सिलसिला जारी है। इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो रही है और आगे भी होने की उम्मीद है। 2026-27 सीजन के दौरान पहले हरी इलायची के उत्पादन में 30 प्रतिशत की भारी गिरावट आने की आशंका व्यक्त की जा रही थी लेकिन अब उत्पादन इतना नहीं घटेगा यदि उत्तर-पूर्व मानसून की अच्छी बारिश हो गई तो फसल की हालत और भी सुधर सकती है।