Home News
13-Oct-2026 05:17 PM
नई दिल्ली। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर धान, मक्का एवं मूंग के उत्पादन क्षेत्र में कमी आई है और कुछ महत्वपूर्ण उत्पादक इलाकों में बारिश का अभाव रहने से फसल की हालत कमजोर बताई जा रही है। इसके फलस्वरूप इन फसलों की औसत उपज दर एवं कुल पैदावार में गिरावट आने की संभावना है।
मक्का एवं मूंग का उत्पादन घटने से इसके बाजर भाव में तेजी को बल मिल सकता है। पशु आहार एवं पॉल्ट्री फीड के साथ-साथ स्टार्च निर्माण उद्योग में मक्का की मांग एवं खपत बढ़ती जा रही है। यह स्थिति एथनॉल निर्माण उद्योग की भी है।
इस बार एथनॉल उत्पादन में मक्का अवयवों का उपयोग काफी घटने की संभावना है क्योंकि सरकार गन्ना जूस एवं सीरप तथा बी-हैवी शीरा के इस्तेमाल पर रोक लगाने पर विचार कर रही हैं। इसके फलस्वरूप अनाज आधारित डिस्टीलरीज का मक्का, सरकारी चावल एवं अन्य टुकड़ी चावल का इस्तेमाल बढ़ाना पड़ेगा। इससे मक्का की मांग, खपत एवं कीमत में वृद्धि हो सकती है। कुछ खाद्य क्षेत्रों में मक्का का दाम अपेक्षाकृत ज्यादा तेज रह सकता है।
जहां तक मूंग का सवाल है तो इसका उत्पादन भी कुछ घटने की संभावना है। विदेशों से मूंग के आयात पर पिछले करीब साढ़े चार साल से प्रतिबंध लगा हुआ है। सरकार के पास इसका अच्छा खासा स्टॉक मौजूद है। लेकिन अन्य दलहनों के असर से इसका दाम भी आगे मजबूत हो सकता है। मूंग की खेती खरीफ, रबी एवं जायद तीनों सीजन में होती है। यदि आगे अच्छी वर्षा हुई और अल नीनो का ज्यादा प्रकोप नहीं रहा तो रबी सीजन में इसका बिजाई क्षेत्र तथा उत्पादन कुछ सुधर सकता है।