पश्चिम एशिया में युद्ध विराम से भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात में सहायता
08-Apr-2026 01:49 PM
नई दिल्ली। ईरान-अमरीका के बीच जारी भीषण जंग को रोकने के लिए दो हफ्तों के युद्ध-विराम पर जो सहमति बनी है उससे तात्कालिक तौर पर भारत को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। यदि स्थायी युद्ध विराम (सीजफायर) लागू होता है तो पूरी दुनिया को राहत मिल जाएगी।
मौजूदा अस्थायी युद्ध विराम के चलते भारत को सम्पूर्ण अरब क्षेत्र में अपने कृषि उत्पादों का निर्यात सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। इसमें बासमती चावल, चाय, काबुली चना, मसाला, सूखे मेवे, चीनी, ऑयल सीड, फसल एवं सब्जी आदि शामिल हैं।
पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र भारतीय कृषि उत्पादों का बहुत बड़ा बाजार है। वहां तनाव कम होने से भारतीय निर्यातकों को अपने उत्पादों का शिपमेंट बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
यद्यपि अभी स्थायी युद्ध विराम की स्थिति अनिश्चित है लेकिन यदि दोनों पक्षों के बीच होने वाली बातचीत बढ़ जाएगी। ईरान ने स्थायी युद्ध विराम के लिए 10 शर्ते रखी हैं जिस पर अमरीका को विचार करना है।
फिलहाल प्रमुख समुद्री मार्गों पर और खासकर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास अनेक जहाज पिछले अनेक दिनों से अटके हुए हैं और इसे जल्दी से जल्दी क्लीयरेंस मिलना आवश्यक है। यदि दो सप्ताह के युद्ध विराम की समय सीमा समाप्त होने तक स्थायी युद्ध विराम पर सहमति नहीं बनी तो समस्या पुनः गंभीर हो सकती है।
लेकिन अगर युद्ध हमेशा के लिए बंद हो गया तो वैश्विक बाजार में विभिन्न कृषि उत्पादों की मांग एवं भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ जाएगी क्योंकि शिपिंग खर्च में कमी आ सकती है।
