रबी फसलों का परिदृश्य
22-Feb-2025 12:59 PM
बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी होने तथा शुरूआती दौर में मौसम की हालत संतोषजनक रहने से चालू रबी सीजन के दौरान विभिन्न फसलों और खासकर गेहूं का उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन फरवरी के मौसम को देखते हुए भारतीय किसानों की चिंता बढ़ने लगी है।
एक तो बारिश में करीब 70 प्रतिशत की गिरावट आ गई और दूसरे, तापमान में असाधारण बढ़ोत्तरी हो गई। इससे फसलों की प्रगति में गंभीर बाधा उत्पन्न होने की आशंका है।
एक और चिंता की बात यह है कि आगामी समय में भी बारिश के संदर्भ में अनिश्चितता बनी हुई है जबकि धूप और गर्मी बढ़ने की संभावना है। इससे गेहूं, चना तथा सरसों सहित अन्य रबी फसलों की उपज दर एवं क्वालिटी पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
यह मौसम रबी फसलों के लिए अच्छा नहीं है और खासकर उत्तरी राज्यों के किसानों को परेशान कर सकता है। आमतौर पर मौसम के रुख में होली पर्व के बाद ही बदलाव का दौर शुरू होता है लेकिन इस वर्ष यह 20-25 दिन पहले ही आरंभ हो गया मौसम विभाग के अनुसार 1 जनवरी से 20 फरवरी के बीच देश में केवल 9.8 मि०मी० वर्षा हुई जो सामान्य औसत बारिश 33 मि०मी० से 70 प्रतिशत की रही। यह चिंताजनक स्थिति है।
देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में हालत ज्यादा खराब है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं गुजरात जैसे प्रांतों में गेहूं का सर्वाधिक उत्पादन होता है।
वहां समय से काफी पहले ही गर्मी की तीव्रता बढ़ गई है। सामन्य औसत की तुलना में हरियाणा में 59 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 78 से 97 प्रतिशत तथा पंजाब में 65 प्रतिशत कम वर्षा होने से गेहूं की फसल का विकास धीमा पड़ गया है और उसके नियत समय से पहले ही पकने की आशंका उत्पन्न हो गई है। जहां तक तापमान का सवाल है तो इसमें भी विकृति या विसंगति देखी जा रही है।
कुछ इलाकों में तापमान में असामान्य वृद्धि देखी जा रही है। देश के मध्यवर्ती एवं उत्तरी क्षेत्र में उच्चतम तापमान सामान्य औसत से ऊपर पहुंच गया है।
न्यूनतम तापमान में भी वृद्धि देखी जा रही है। यदि जल्दी ही मौसम की हालत सामान्य नहीं हुई तो रबी फसलों की दशा खराब हो सकती है।
उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी ने खासी चिंता पैदा कर दी है। उत्तर प्रदेश गेहूं का सबसे प्रमुख तथा सरसों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।
प्रतिकूल मौसम के कारण रबी फसलों का परिदृश्य अभी उत्साहवर्धक से घटकर संतोषजनक स्तर की ओर आने लगा है जबकि आगामी समय में यह कमजोर अवस्था में पहुंच सकता है।
