राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन के निर्यात पर लगी रोक को हटाने का आग्रह

29-Aug-2025 10:45 AM

मुम्बई। एक अग्रणी उद्योग संगठन- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) ने एक बार फिर केन्द्र सरकार को राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन (डि ऑयल्ड राइस ब्रान या डीओआरबी) के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने और रोक की समय सीमा को 30 सितम्बर 2025 से आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया है।

सरकार को भेजे एक पत्र में 'सी' के अध्यक्ष ने कहा है कि  28 जुलाई 2023 से ही डीओआरबी के निर्यात पर पाबंदी लगी हुई है और इसकी अवधि बार-बार बढ़ाई जाती रही है। नवीनतम समय सीमा 30 सितम्बर 2025 तक निर्धारित की गई है। इसे आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। 

एसोसिएशन के अनुसार प्रतिबंध लगने से पूर्व भारत से करीब 5-6 लाख टन डीओआरबी का वार्षिक निर्यात हो रहा था जिससे देश को करीब 1000 करोड़ रुपए की सालाना आय प्राप्त हो रही थी।

इसका शिपमेंट वियतनाम एवं थाईलैंड सहित कई अन्य एशियाई देशों को होता था। भारत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डीओआरबी का एक प्रमुख एवं विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बना हुआ था। 

'सी' के पत्र में कहा गया है कि जिस समय डीओआरबी के निर्यात पर पाबंदी लगाई गई थी तब परिस्थितियां उसके अनुकूल थी लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल गए हैं। वर्ष 2023 में राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन का बाजार भाव बढ़कर 20,000 रुपए प्रति टन पर पहुंच गया था मगर अब घटकर 10,000-11,000 रुपए प्रति टन पर आ गया है।

इस तरह कीमतों में करीब 50 प्रतिशत की भारी गिरावट आने से उद्योग को काफी नुकसान हो रहा है। यदि निर्यात प्रतिबंध जारी रहा तो इसकी कीमतों में आगे और गिरावट आ सकती है। दरअसल डिस्टीलर्स ड्राईड ग्रेन्स विद सोल्यूबल्स (डीडीजीएस) की बढ़ती उपलब्धता से घरेलू प्रभाग में डीओआरबी की मांग एवं खपत घटती जा रही है और उद्योग के पास अनबिके माल का स्टॉक बढ़ रहा है।

पिछले ढाई वर्षों के दौरान सभी ऑयल मील के दाम में 40-50 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। अब सरकार को डीओआरबी का निर्यात दोबारा शुरू करने की अनुमति देने पर गम्भीरतापूर्वक विचार करना चाहिए।