राजस्थान में बाढ़ वर्षा से खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका

15-Sep-2025 05:07 PM

जयपुर। देश के पश्चिमी भाग में अवस्थित एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में खरीफ फसलों की बिजाई का अभियान लगभग समाप्त हो चुका है और इसका उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के लगभग बराबर ही रहा है लेकिन आयात अधिशेष बारिश से खेतों में पानी भरने और कुछ क्षेत्रों  में बाढ़ का प्रकोप रहने से खासकर दलहनों एवं मोटे अनाजों की फसल को नुकसान होने की आशंका है।

राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक चालू वर्ष के दौरान 9 सितम्बर तक राजस्थान में खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 1 57,77 लाख हेक्टेयर रहा जबकि पिछले साल की इसी अवधि में 157.74 लाख हेक्टेयर दर्ज किया।  

मौसम विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वर्ष के दौरान 1 जून से 12 सितम्बर के बीच राजस्थान में मानसून की वर्षा सामान्य औसत से 70 प्रतिशत अधिक हुई जिससे कई क्षेत्रों में लम्बे समय तक खेतों में पानी भरा रहा और आगे वहां खरीफ फसलें क्षतिग्रस्त हो गई।

जानकारों का कहना है कि बिजाई क्षेत्र लगभग बराबर होने के बावजूद राजस्थान में इस बार खरीफ उत्पादन कम हो सकता है और अधिकांश फसलों के उत्पादन में गिरावट आ सकती है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान  खरीफ कालीन मूंग बाजरा एवं ग्वार का सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त है जबकि मूंगफली के उत्पादन में दूसरे और सोयाबीन के उत्पादन में तीसरे नंबर पर रहता है।  

राजस्थान में कई भागों में जून-जुलाई के दौरान अत्यधिक वर्षा हुई जबकि अगस्त में कुछ दिनों तक मानसून निष्क्रिय रहा। इसके बाद सितम्बर से प्रथम सप्ताह में वहां अत्यन्त मूसलाधार वर्षा हुई। इससे चारे की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई।

यही स्थिति पंजाब की भी रही। इससे स्थिति और भी जटिल हो गई और पंजाब से आने वाले चारे का दाम 6 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 8-9 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया। राजस्थान को चारा के लिए इस बार अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ेगा। 

किसान महा पंचायत के अध्यक्ष का कहना है कि खरीफ फसलों की बिजाई के बारे में सरकार का आंकड़ा भ्रामक है क्योंकि उसमें उस क्षेत्रफल को भी शामिल किया गया है जिसमें भारी वर्षा एवं बाढ़ के कारण फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

ऐसे क्षेत्रों में किसान अब रबी सीजन की फसलों की बिजाई शुरू करने का इंतजार कर रहे हैं। राजस्थान में खरीफ फसलों का सामान्य औसत क्षेत्रफल इस बार 164.55 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि वास्तविक रकबा इससे काफी पीछे रह गया।