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22-Sep-2026 03:52 PM
बीकानेर। देश के सबसे प्रमुख मूंग उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में नए माल की आवक शुरू हो चुकी है मगर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर इसकी सरकारी खरीद के बारे में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है और दाल मिलर्स तथा व्यापारियों / स्टॉकिस्टों की मांग भी कमजोर देखी जा रही है। इसके फलस्वरूप किसानों को एमएसपी से नीचे दाम पर अपनी मूंग का स्टॉक बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
चालू माह के शुरूआती 18 दिनों के दौरान राजस्थान की मंडियों में करीब 63 हजार टन नई मूंग की भारी आवक हुई जो 2025 की समान अवधि की आपूर्ति 6453 टन से करीब 70 गुणा अधिक रही। वर्ष 2024 की इसी अवधि में वहां 7574 टन मूंग की आपूर्ति हुई थी।
पिछले साल राजस्थान में खरीफ सीजन के दौरान मूंग का बिजाई क्षेत्र बढ़कर 26.57 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया था जिसे देखते हुए इस वर्ष इसकी बिजाई का लक्ष्य 26.50 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया गया लेकिन इसका वास्तविक रकबा 13 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23.17 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। पिछले खरीफ सीजन के दौरान राजस्थान में मूंग का उत्पादन 13.89 लाख टन आंका गया जो कुल राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 72 प्रतिशत था। हालांकि मोठ के बिजाई क्षेत्र में कुछ सुधार आया लेकिन फिर भी वह 10 लाख हेक्टेयर के नियत लक्ष्य से कुछ पीछे रह गया।
समझा जाता है कि मंडियों में जोरदार आवक होने से मूंग के दाम पर दबाव पड़ रहा है। 2026-27 सीजन के लिए मूंग का एमएसपी 8780 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है जबकि राज्य की मंडियों में औसत भाव 7400-7500 रुपए प्रति क्विंटल ही चल रहा है।