रिकॉर्ड सरकारी खरीद के बावजूद सोयाबीन का मंडी भाव एमएसपी से नीचे

21-Apr-2025 08:14 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय की अधीनस्थ एजेंसी- भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नैफेड) द्वारा मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत देश के शीर्ष उत्पादक राज्यों में किसानों से 2024-25 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान लगभग 14.72 लाख टन सोयाबीन की रिकॉर्ड खरीद की गई मगर फिर भी इस महत्वपूर्ण तिलहन का थोक मंडी भाव केन्द्रीय सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4892 रुपए प्रति क्विंटल से काफी नीचे रहा।

जिन किसानों को सरकारी क्रय केन्द्रों पर अपना उत्पाद बेचने में सफलता मिली उन्हें तो समर्थन मूल्य हासिल हो गया मगर अन्य उत्पादकों को नुकसान हो रहा है। अब भी सोयबीन का दाम एमएसपी से काफी नीचे है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2024-25 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान नैफेड द्वारा महाराष्ट्र में सर्वाधिक 8,36,741 टन सोयाबीन खरीदा गया जबकि मध्य प्रदेश में 3,88,796 टन, राजस्थान में 98,867 टन, गुजरात में 48,055 टन, तेलंगाना में 81,122 टन तथा कर्नाटक में 18,200 टन के साथ समूचे देश में कुल 14,71,781 टन सोयाबीन की खरीद की गई। इसके अलावा एक अन्य सरकारी एजेंसी- राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ द्वारा भी सोयाबीन खरीदा गया।

सोयाबीन के साथ-साथ नैफेड द्वारा 2024-25 के खरीफ मार्केटिंग सीजन में मूंगफली की भी रिकॉर्ड खरीद की गई। इसकी कुल खरीद 14,43,209 टन दर्ज की गई।

इसके तहत गुजरात में सर्वाधिक 9,22,669 टन, राजस्थान में 4,38,886 टन उत्तर प्रदेश में 79,601 टन तथा कर्नाटक में 2054 टन मूंगफली की खरीद शामिल रही।

नैफेड ने राजस्थान में अपने स्टॉक से मूंगफली की नीलामी बिक्री आरंभ कर दी है मगर उद्योग संगठनों के जोरदार आग्रह को देखते हुए सोयाबीन का स्टॉक खुले बाजार में उतारने का प्लान फिलहाल स्थगित कर दिया है

क्योंकि सरकारी स्टॉक के उतरने पर सोयाबीन का बाजार और नीचे जा सकता है जिससे अगली बिजाई प्रभावित हो सकती है। नैफेड द्वारा कर्नाटक में 3272 टन सूरजमुखी की खरीद भी 7280 हजार टन क्विंटल की दर से की गई।