रिकॉर्ड उत्पादन और आयात के बावजूद मक्का में किसानों का रुझान बढ़ा — इथेनॉल ने डाली मक्का में जान, लेकिन आगे राह नहीं आसान?

16-Jul-2025 09:48 AM

रिकॉर्ड उत्पादन और आयात के बावजूद मक्का में किसानों का रुझान बढ़ा — इथेनॉल ने डाली मक्का में जान, लेकिन आगे राह नहीं आसान?
★ देश में मक्का की खेती और उत्पादन ने नए आयाम छू लिए हैं। कृषि मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में उत्पादन 422.81 लाख टन, 2023-24 में 376.65 और 2022-23 में 380.85 लाख टन रहा। इस खरीफ सीज़न में लगभग सभी राज्यों में मक्का की बुआई तेज़ गति से हो रही है। अगर ★ यही रुझान जारी रहा, तो लगातार दूसरे साल भी रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना बन रही है।
★ 2023-24 में केवल 1.26 लाख टन मक्का आयात हुआ था, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 9.55 लाख टन तक पहुंचा।
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इथेनॉल डिमांड का असर साफ, कीमतों में लगातार तेजी का माहौल
★ गुलाबबाग मंडी में मक्का की कीमतें 15 मई 2025 को ₹2,180/क्विंटल, 14 जून 2025 को ₹2,230/क्विंटल और 15 जुलाई 2025 में ₹2,350/क्विंटल रहीं।
★ अब इथेनॉल का उत्पादन कई स्रोतों से हो रहा है — जैसे गन्ना, बी मोलासेस, सी मोलासेस और चावल। पहले इन उत्पादों से इथेनॉल बनाने पर प्रतिबंध था।
★ FCI से 17 लाख मीट्रिक टन चावल इथेनॉल निर्माण हेतु उठाया गया, और यह आँकड़ा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।
★ इथेनॉल बनाने वाली कंपनियां सरकार से मक्का से बने इथेनॉल की कीमतें बढ़ाने की मांग कर रही हैं। लेकिन अगर सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) नहीं बढ़ाती, तो ये कंपनियां मक्का को छोड़कर चावल या अन्य सस्ते स्रोतों की ओर रुख कर सकती हैं।
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★ अमेरिका भारत पर मक्का आयात बढ़ाने का दबाव बना रहा है। यदि सरकार की नीति में बदलाव होता है या इथेनॉल निर्माता लागत को लेकर मक्का से दूरी बनाते हैं, तो मक्का की घरेलू डिमांड में गिरावट संभव है।
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★ मक्का की खेती और व्यापार वर्तमान में इथेनॉल नीतियों, वैश्विक दबाव और सरकारी समर्थन पर निर्भर है।
★ किसानों और व्यापारियों को इस बदलते परिदृश्य में सतर्कता बरतनी होगी। उत्पादन और मांग में संतुलन बनाए रखना अब भविष्य की बड़ी चुनौती बन सकता है।