रेपसीड मील का निर्यात प्रदर्शन सुधरने के आसार

21-Apr-2025 01:31 PM

नई दिल्ली। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 की सम्पूर्ण अवधि (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत से सरसों खल (रेपसीड मील) का निर्यात 18.75 लाख टन पर अटक गया जो 2023-24 के सकल शिपमेंट 22.13 लाख टन से काफी कम रहा।

इसके फलस्वरूप निर्यात आमदनी भी 5311 करोड़ रुपए से लुढ़ककर 4232 करोड़ रुपए पर अटक गई। इसका औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य भी 23990 रुपए प्रति टन से घटकर 22570 रुपए प्रति टन रह गया।

इससे पूर्व 2022-23 के वित्त वर्ष में 5189 करोड़ रुपए मूल्य के 22.97 लाख टन रेपसीड मील का शानदार निर्यात हुआ था। 

एसोसिएशन का कहना है कि 2025-26 के वर्तमान वित्त वर्ष में भारतीय रेपसीड मील का निर्यात प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है क्योंकि चीन में इसकी मांग तेजी से बढ़ती जा रही है।

दरअसल चीन पिछले कई वर्षों से कनाडा से कैनोला (सरसों- रेपसीड की एक प्रजाति) मील का भारी आयात कर रहा था इसलिए उसे भारत से सरसों खल के ज्यादा आयात की आवश्यकता नहीं पड़ रही थी।

मगर अब हालात बदल गए हैं। कनाडा सरकार ने चीन के कुछ समानों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया और चीन ने भी बदले की कार्रवाई के तहत कनाडा के कैनोला एवं इसके मूल्य संवर्धित उत्पाद तथा मटर पर 100 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाने की घोषणा कर दी।

यह नया शुल्क 20 मार्च 2025 से प्रभावी हो गया। इसके साथ ही चीन में अब कनाडाई कैनोला मील का आयात लगभग बंद हो गया है और उसके आयातक भारतीय रेपसीड मील की खरीद में भारी दिलचस्पी दिखाने लगे हैं।

इसके फलस्वरूप आगामी महीनों में भारत से चीन को भारी मात्रा में इसका निर्यात होने की उम्मीद है। भारत में सरसों की नई फसल की जोरदार आवक हो रही है और रेपसीड मील का निर्यात प्रदर्शन बेहतर होने पर सरसों के दाम में कुछ इजाफा हो सकता है जिससे किसानों को राहत मिलेगी।

वर्तमान समय में हैम्बर्ग (जर्मनी) में रेपसीड मिल का अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क भाव 335 डॉलर प्रति टन चल रहा है जबकि भारतीय रेपसीड मील का ऑफर मूल्य कांडला बंदरगाह पर महज 209 डॉलर प्रति टन ही है।