राष्ट्रीय स्तर पर सरसों की औसत दैनिक आवक 8 लाख बोरी पर पहुंचने से भाव नरम

04-Mar-2025 01:26 PM

जयपुर। हालांकि इस बार सरसों की नई फसल की कटाई-तैयारी एवं मंडियों में आवक लगभग 15 दिनों की देरी से आरंभ हुई लेकिन अब इसकी रफ्तार तेज हो गई है।

इसके फलस्वरूप आपूर्ति बढ़ने लगी है और उसके अनुरूप खरीदारी नहीं होने से कीमतों पर दबाव पड़ने लगा है। जयपुर स्थित प्रतिष्ठान- मरुधर ट्रेडिंग एजेंसी के अनिल चतर का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में सरसों की औसत दैनिक आवक बढ़ते हुए अब 8 लाख बोरी तक पहुंच गई है।

फिलहाल राजस्थान में करीब 3.50 लाख बोरी, मध्य प्रदेश एवं गुजरात में 1.50-1.50 लाख बोरी, उत्तर प्रदेश में 1.00 लाख बोरी तथा देश के अन्य राज्यों की मंडियों में 50 हजार बोरी सरसों की रोजाना आपूर्ति हो रही है। मार्च से मई तक मंडियों में सरसों की जोरदार आवक होती है और उसके बाद आपूर्ति की मात्रा घटने लगती है। 

42 प्रतिशत तेल कंडीशन वाली सरसों का थोक मंडी भाव 3 मार्च को 150 रुपए की गिरावट के साथ 6150 रुपए प्रति क्विंटल रह गया।

नए माल की जबरदस्त आवक होने पर कीमतों में कुछ और नरमी आने की संभावना है। अनिल चतर के मुताबिक सरसों की बिजाई इस बार कम क्षेत्रफल में हुई है।

पिछले सीजन में इसका बिजाई क्षेत्र बढ़कर 101 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया था जो चालू सीजन में 98 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंच सका। कच्ची घानी सरसों तेल का थोक मूल्य करीब 132 रुपए प्रति किलो चल रहा है जबकि सरसों खल का प्लांट डिलीवरी भाव 2050 रुपए प्रति क्विंटल है। 

अनिल चतर के अनुसार सरसों की नई फसल की आवक शुरू होने में करीब एक पखवाड़े की देर अवश्य हो गई लेकिन अब आपूर्ति की गति तेज होती जा रही है।

इससे रबी सीजन के इस सबसे महत्वपूर्ण तिलहन का भाव कुछ नरम हो गया है। कीमतों में नरमी आने से मिलर्स एवं व्यापारियों की दिलचस्पी इसकी खरीद में बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

अच्छी बात यह है कि चालू सीजन के दौरान सरसों में तेल की औसत रिकवरी दर ऊंची देखी जा रही है। सरसों में तेल की मात्रा गत वर्ष के मुकाबले इस बार करीब 1 प्रतिशत ज्यादा है। इससे तेल का कुल उत्पादन बढ़ने के आसार हैं।