'सी' द्वारा सरकार से डीओआरबी का निर्यात खोलने का अनुरोध

17-Apr-2025 03:12 PM

मुम्बई। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) ने केन्द्र सरकार से एक बार फिर डि ऑयल्ड राइस ब्रान (डीओआरबी) के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को समाप्त करने का अनुरोध किया है।

एसोसिएशन द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि राइस ब्रान एक्सट्रैक्टर्स का निर्यात खोलने से देश को आर्थिक रूप से लाभ होगा और कृषि तथा पर्यावरण क्षेत्र पर सकारात्मक असर पड़ेगा। 

एसोसिएशन के अनुसार देश के अंदर सभी फीड मिलों की मांग एवं जरूरत को पूरा करने के बाद लगभग 15 लाख टन राइस ब्रान का अधिशेष स्टॉक मौजूद रहता है

जो बर्बाद हो जाता है और इससे देश को करीब 650 करोड़ रुपए के राजस्व से वंचित रहना पड़ता है। भारत में राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन का कोई अभाव नहीं है बल्कि हकीकत तो यह है कि अधिशेष उत्पादन बर्बाद हो रहा है जिसका सदुपयोग होना आवश्यक है।

विस्तृत गणना एवं सम्बद्ध पक्षों के आंकलन के आधार पर एसोसिएशन ने विभिन्न मंत्रालयों को व्यापक आंकड़ा सौंपा है जिसमें राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन की मांग एवं जरूरत तथा आपूर्ति एवं उपलब्धता का विस्तार से ब्यौरा किया गया है।

इसके आधार पर एसोसिएशन ने डीओआरबी के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को जल्दी से जल्दी हटाने का आग्रह किया है जो तर्क संगत एवं देश हित में है। 

'सी' का कहना है कि राइस ब्रान का जो अधिशेष स्टॉक बर्बाद चला जाता है उसकी प्रोसेसिंग (एक्सट्रैक्शन) से राइस ब्रान तेल एवं मील का निर्माण किया जा सकता है।

इससे- जहां एक ओर राइस ब्रान तेल का उत्पादन बढ़ेगा और विदेशों से खाद्य तेलों का आयात घटाने में मदद मिलेगी वहीं दूसरी तरफ राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन के निर्यात से उद्योग की आमदनी बढ़ेगी और देश को भी बहुमूल्य विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी। दक्षिण-पूर्व एशिया में डीओआरबी की भारी मांग रहती है। 

केन्द्र सरकार सभी किस्मों एवं श्रेणियों के चावल का निर्यात पहले ही खोल चुकी है और हर तरह का ऑयल मील भी भारत से निर्बाध रूप से बाहर भेजा जा रहा है।

ऐसी हालत में सिर्फ राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन के निर्यात पर पाबंधी जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। राइस मिलर्स को पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।