सीमा शुल्क सहित अन्य शर्तें लागू होने से पीली मटर का आयात प्रभावित होने की आशंका

03-Mar-2025 03:24 PM

नई दिल्ली। पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 28 फरवरी 2025 को समाप्त हो गई और इसे आगे बढ़ाने के लिए कोई अधिसूचना जारी नहीं होने से शुल्क मुक्त आयात का रास्ता बंद हो गया।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने 8 दिसम्बर 2023 को पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी थी और फिर इसकी समय सीमा बढ़ाई जाती रही। अंतिम बार  25 दिसम्बर 2024 को अधिसूचना जारी करके 28 फरवरी तक अवधि बढ़ाई गई। 

ध्यान देने की बात है कि पहली बार 8 दिसम्बर 2023 को जो अधिसूचना जारी हुई थी उसमें कहा गया था कि आगे यदि कोई नई अधिसूचना जारी नहीं की गई तो यह माना जाएगा कि पीली मटर के आयात पर पुराना शुल्क एवं नियम लागू हो गया है।

उस समय केवल कोलकाता बंदरगाह पर इसके आयात की अनुमति थी और यह शर्त भी लागू थी कि पीली मटर का भारतीय बंदरगाह पर आयात खर्च 200 रुपए प्रति किलो से नीचे नहीं होना चाहिए।

पीली मटर पर 60 प्रतिशत का बुनियादी आयात शुल्क तथा 10 प्रतिशत का कृषि ढांचा सेस सहित कुल 66 प्रतिशत का सीमा शुल्क लागू था जो अब पुनः प्रभावी हो गया है। 

उद्योग-व्यापार क्षेत्र के शीर्ष संगठनों द्वारा सरकार से पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात पर अंकुश लगाने का आग्रह किया जा रहा था क्योंकि इसके विशाल आयात के कारण चना सहित अन्य दलहनों का भाव घटकर काफी नीचे आ गया।

अब पीली मटर की उन खेपों के आयात की अनुमति होगी जिसके लिए लेडिंग बिल 28 फरवरी 2025 को उससे पूर्व जारी किया गया है। इन खेपों को 31 मार्च 2025 से पूर्व भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचना आवश्यक होगा।  

वर्ष 2024 में देश के अंदर 30 लाख टन से ज्यादा पीली मटर का आयात किया गया। इसमें से सर्वाधिक मात्रा कनाडा तथा  रूस से मंगाई गई।

इस विशाल आयात के कारण देसी चना, अरहर (तुवर), उड़द एवं मसूर का भाव तेजी से घटने लगा और अब यह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास या उससे नीचे आ गया है।

पीली मटर का आयात बंद होने से न केवल इसके स्टॉक की बिक्री ऊंचे दाम पर की जाएगी बल्कि अन्य दलहनों की कीमतों में भी सुधार आ सकता है। चना तथा मसूर एवं मटर की नई घरेलू फसल की आवक जल्दी ही जोर पकड़ने की संभावना है।