समुचित एवं सामयिक उपाए के बगैर वाणिज्य में गेहूं का उत्पादन घटना संभव
27-Aug-2025 05:18 PM
ग्वालियर। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने हाल के वर्षों में गेहूं के घरेलू उत्पादन में मिली सफलता का उल्लेख करते हुए भविष्य की चुनौतियों को भी रेखांकित किया है।
ग्वालियर में गेहूं एवं जौ पर आयोजित राष्ट्रीय परामर्श गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, पानी के अभाव तथा बढ़ते तापमान जैसी चुनौतियां भविष्य में बढ़ सकती है और इसके दुष्प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए अगर समुचित और सामयिक एहतियाती उपाय नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में गेहूं का घरेलू उत्पादन प्रभावित हो सकता है और इसमें गिरावट आ सकती है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान गेहूं के घरेलू उत्पादन एवं बिजाई क्षेत्र में अच्छी या सामान्य बढ़ोत्तरी हुई है।
इसका बिजाई क्षेत्र 2020-21 सीजन के 311.25 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 के सीजन में 327.61 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा और इसमें प्रति वर्ष 1.29 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
इसी तरह इसी अवधि में गेहूं का उत्पादन भी 1095.86 लाख टन से बढ़कर 1175.07 लाख टन पर पहुंच गया और इसमें 1.76 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई। लेकिन गेहूं की औसत उपज दर में कम वृद्धि हुई।
2020-21 के सीजन में यह उपज दर 3521 किलो प्रति हेक्टेयर थी जो 2024-25 में महज 0.46 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर के साथ 3587 किलो प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकी। बिजाई क्षेत्र एवं उत्पादन में वृद्धि के अनुरूप उपज दर नहीं बढ़ सकी।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार गेहूं का घरेलू उत्पादन 2020-21 के रबी सीजन में 1095.86 लाख टन हुआ था जो 2021-22 में घटकर 1077.42 लाख टन पर आने के बाद 22-23 के सीजन में उछलकर 1175.07 लाख टन पर पहुंचा।
कृषि मंत्री के अनुसार भारत पहले गेहूं के आयात पर काफी हद तक निर्भर था मगर अब आयात की आवश्यकता नहीं पड़ती है। सरकार ने इसके आयात पर 40 प्रतिशत का भारी भरकम सीमा शुल्क लगा रखा है। कुछ वर्ष पूर्व भारत से गेहूं की विशाल मात्रा का निर्यात हुआ था लेकिन बाद में इस पर रोक लग गई।
