साप्ताहिक समीक्षा-गेहूं
08-Feb-2025 07:29 PM
मिलर्स- प्रोसेसर्स की मांग से गेहूं की कीमतों में वृद्धि
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में सीमित मात्रा में गेहूं की आवक हो रही है और सरकारी गेहूं की बिक्री भी मिलर्स- प्रोसेसर्स की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। नई फसल की आवक शुरू होने में अभी देर है जबकि ऊंचे तापमान से कुछ क्षेत्रों में गेहूं की फसल को नुकसान होने की आशंका है।
दिल्ली
हालांकि 1-7 फरवरी वाले सप्ताह के दौरान दिल्ली में यूपी / राजस्थान के गेहूं का भाव 3100 रुपए प्रति क्विंटल पर स्थिर बना रहा लेकिन अन्य राज्यों में गेहूं की कीमतों में आमतौर पर तेजी देखी गई। इंदौर में यह 116 रुपए बढ़कर 2650/3136 रुपए प्रति क्विंटल, राजस्थान के कोटा में 240 रुपए उछलकर 2900/3110 रुपए प्रति क्विंटल तथा उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में 100 रुपए बढ़कर 2911/2921 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। कुछ अन्य मंडियों में भी 50-100 रुपए की तेजी रही।
बिक्री
खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत प्रत्येक सप्ताह 1.50 लाख टन गेहूं की बिक्री का ऑफर दिया जा रहा है जो करीब 6 लाख टन मासिक बैठता है। देश भर के फ्लोर मिलर्स की प्रोसेसिंग क्षमता इससे कहीं अधिक है। अपनी मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए मिलर्स- प्रोसेसर्स को खुली मंडियों से गेहूं खरीदने के लिए विवश होना पड़ रहा है जबकि इन मंडियों में भी पर्याप्त मारा में गेहूं की आपूर्ति नहीं हो रही है।
कोटा
सरकार ने ओएमएसएस के तहत 31 मार्च 2025 तक की बिक्री के लिए गेहूं का कुल कोटा 25 लाख टन से बढ़ाकर 30 लाख टन नियत करने का निर्णय लिया है लेकिन इसका कोई खास सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है। भारत ब्रांड नाम के तहत रियायत मूल्य पर आटा की बिक्री हो रही है। इसका असर भी गेहूं के दाम पर नहीं पड़ रहा है।
भाव
इतना अवश्य है कि पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान दिल्ली में गेहूं के दाम में नरमी आई है तथा अन्य मंडियों में भी इसमें जोरदार तेजी की रफ्तार पर कुछ हद तक ब्रेक लगा है लेकिन फिर भी रबी सीजन के इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण खाद्यान्न का भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा चल रहा है। इससे सरकार की चिंता बढ़ सकती है क्योंकि अगले रबी मार्केटिंग सीजन में केन्द्रीय पूल के लिए इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की खरीद बढ़ाने में कठिनाई होने की संभावना है।
