साप्ताहिक समीक्षा-हल्दी
08-Feb-2025 07:38 PM
हल्दी उत्पादन के पूर्वानुमानों में कटौती
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र में हल्दी फसल को रोज लगने से नुकसान के समाचार मिल रहे हैं। जिस कारण से हल्दी उत्पादन के पूर्वानुमानों में कमी आने लगी है। उल्लेखनीय है कि चालू सीजन के लिए सभी उत्पादक राज्यों में हल्दी की बिजाई अधिक क्षेत्रफल पर की गई थी लेकिन निजामाबाद लाइन को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में फसल को नुकसान होने के कारण कुल उत्पादन प्रभावित हुआ है हालांकि पैदावार गत वर्ष की तुलना में अधिक रहेगी। लेकिन बिजाई के अनुसार उत्पादन कम माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अधिक बिजाई क्षेत्रफल के चलते संभावना व्यक्त की जा रही थी इस वर्ष देश में हल्दी का उत्पादन 85/90 लाख बोरी के आसपास हो जएगा। लेकिन बिजाई के पश्चात आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु के अलावा महाराष्ट्र में भी फसल प्रभावित होने के समाचार मिल रहे हैं। जिस कारण से वर्तमान में हल्दी उत्पादन का अनुमान 70/75 लाख बोरी होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
चालू सप्ताह के दौरान हालांकि हाजिर बाजारों में हल्दी की कीमतें अपने पूर्व स्तर पर दबी रही क्योंकि नई फसल की आवक को देखते हुए लिवाल कम था। जबकि वायदा बाजार में अप्रैल माह की हल्दी 13190 रुपए खुलने के पश्चात सप्ताहांत में 13490 रुपए पर बंद हुई है। मई माह की हल्दी भी 13022 रुपए खुलने के पश्चात 13442 रुपए पर बंद हुई।
वर्तमान में निजामाबाद मंडी में नई हल्दी की आवक धीरे-धीरे बढ़नी शुरू हो गई है और मंडी में नए मालों की आवक 12/15 हजार बोरी दैनिक की होने लगी है। नए मालों में 8/10 प्रतिशत की नमी आ रही है। आगामी दिनों में सूखे मालों की आवक बढ़ने लगेगी। साथ ही फरवरी अंत या मार्च के शुरू में अन्य उत्पादक राज्यों में भी नए मालों का श्री गणेश हो जाएगा।
उत्पादन
व्यापारिक सूत्रों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान मराठवाड़ा लाइन (बसमत, हिंगोली, नांदेड) पर हल्दी का उत्पादन 30/32 लाख बोरी एवं सांगली लाइन पर 9/10 लाख बोरी का उत्पादन रहेगा। निजामाबाद लाइन पर उत्पादन 13/15 लाख बोरी एवं वारंगल लाइन पर पैदावार 1/1.50 लाख बोरी होने की संभावना है। दुग्गीराला एवं कडप्पा लाइन पर उत्पादन 2/2.50 लाख बोरी होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। इरोड एवं सेलम लाइन पर उत्पादन 10/11 लाख बोरी होने के समाचार है। अन्य क्षेत्रों में उत्पादन 4/5 लाख बोरी माना जा रहा है। कुल मिलाकर इस वर्ष पैदावार 70/75 लाख बोरी की मानी जा रही है जबकि गत वर्ष 50/55 लाख बोरी का उत्पादन माना गया था।
कुल उपलब्धता
चालू सीजन के दौरान हल्दी की पैदावार 70/75 लाख बोरी एवं बकाया स्टॉक 15/18 लाख बोरी को मिलाकर कुल उपलब्धता 85/90 लाख बोरी के आसपास रहेगी। जबकि निर्यात एवं घरेलू मांग को पूरा करने के लिए लगभग 1/1.10 करोड़ बोरी की आवश्यकता होती है। जिस कारण से वर्ष 2025 के दौरान हल्दी के भाव तेज रहने की संभावना है। सूत्रों का मानना है कि उत्पादक केन्द्रों पर नए मालों की आवक घटने के साथ ही कीमतों में धीरे-धीरे तेजी का दौर शुरू हो जाएगा। वर्तमान में दिल्ली बाजार में हल्दी सिंगल पालिश गठ्ठा का भाव 138/140 रुपए चल रहा।
मंद-तेजी
सूत्रों का मानना है कि हल्दी की वर्तमान कीमतों में हाल-फिलहाल अधिक मंदा- तेजी की संभावना नहीं है। क्योंकि आगामी दिनों में मंडियों में नए मालों की आवक बढ़नी शुरू हो जाएगी। जिस कारण अभी बाजार सीमित दायरे में ही बने रहेगे। नए मालों की आवक का दबाव बनने पर कीमतों में 3/5 रुपए प्रति किलो की गिरावट संभव है। इससे अधिक मंदे की संभावना नहीं है। क्योंकि स्टॉक कम रह जाने के कारण सूखे मालों की आवक शुरू होने के पश्चात स्टॉकिस्टों की लिवाली बाजार में आएगी। जोकि कीमतों को अधिक घटने नहीं देगी।
निर्यात अधिक
चालू सीजन के दौरान एक ओर जहां हल्दी निर्यात में मात्रात्मक रूप में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं निर्यात से प्राप्त आय 68 प्रतिशत बढ़ी है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-नवम्बर - 2024 के दौरान 12160.21 टन हल्दी निर्यात से 1984.46 करोड़ की आय प्राप्त हुई है। जबकि गत वर्ष अप्रैल-नवम्बर - 2023 में 110745.34 टन हल्दी निर्यात से 1178.42 करोड़ की आय अर्जित की गई थी।
