साप्ताहिक समीक्षा-जीरा

30-Nov-2024 07:34 PM

गुजरात में जीरा बिजाई घटने के अनुमान 

नई दिल्ली। चालू सप्ताह के दौरान जीरा की कीमते मजबूत बनी रही। वर्तमान हालात को देखते हुए आगामी दिनों में भाव बढ़ने के व्यापरिक अनुमान लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि दिसम्बर माह के दौरान रमजान की मांग निकलनी शुरू हो जाएगी। जिस कारण से आगामी दिनों में जीरे का निर्यात बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा गुजरात में इस वर्ष बिजाई क्षेत्रफल में गिरावट आने की संभावना है। हालांकि राजस्थान में बिजाई गत वर्ष के बराबर होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। इस वर्ष देर तक तापमान अधिक रहने के कारण बिजाई में विलम्ब हुआ है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष राजस्थान एवं गुजरात में जीरे की बिजाई 12.64 लाख हेक्टेयर पर की गई थी। जबकि वर्ष 2023 में बिजाई का क्षेत्रफल 7.73 लाख हेक्टेयर का रहा था। गत सीजन में अधिक बिजाई एवं अनुकूल मौसम के कारण जीरा उत्पादन 1.10 करोड़ बोरी होने के अनुमान लगाए गए थे। सूत्रों का कहना है कि चालू सीजन के दौरान गुजरात में जीरे की बिजाई 20/25 प्रतिशत घट सकती है जबकि राजस्थान में बिजाई गत वर्ष के बराबर रहने की संभावना है। एक अनुमान के अनुसार गत वर्ष गुजरात में जीरे की बिजाई 5.21 लाख हेक्टेयर एवं राजस्थान में 7.43 लाख हेक्टेयर पर की गई थी। 
उत्पादन के पूर्वानुमान 
अभी तक के उत्पादक केन्द्रों से मिल रहे बिजाई के समाचारों को देखते हुए संभावना व्यक्त की जा रही है कि वर्ष 2025 के दौरान देश में जीरा उत्पादन 75/80 लाख बोरी (प्रत्येक बोरी 55 किलो) के आसपास रहने की संभावना है। बशर्ते कि बिजाई के पश्चात मौसम फसल के अनुकूल रहे। वर्ष 2024 के दौरान देश में जीरा उत्पादन 1/1.10 करोड़ बोरी एवं वर्ष 2023 के दौरान 55/60 लाख बोरी जीरा उत्पादन के व्यापारिक अनुमान लगाए गए थे। हालांकि गत वर्ष नई फसल के आने के समय जीरा का बकाया स्टॉक लगभग समाप्त हो गया था लेकिन इस वर्ष नई फसल के समय बकाया स्टॉक 15/20 लाख बोरी रहने की संभावना है। 
मंदा नहीं 
विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि जीरे की वर्तमान कीमतों में अधिक मंदे की संभावना नहीं है। आगामी दिनों में निर्यात मांग बढ़ने पर कीमतों में तेजी संभव है। वर्तमान में जीरे का निर्यात भाव 4911 रुपए प्रति 20 किलो चल रहा है लेकिन इन भावों पर लिवाली सीमित है। आगामी दिनों में रमजान की मांग आने पर जीरा निर्यात का भाव 5200/5300 रुपए प्रति 20 किलो बनने की संभावना है। इससे अधिक तेजी की संभावना नहीं है। क्योंकि क्योंकि वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर लगभग 30 प्रतिशत माल स्टॉक में जमा है। अतः भाव बढ़ने के पश्चात किसानी माल की आवक बढ़ने की संभावना है जोकि कीमतों को अधिक नहीं बढ़ने देगी। उल्लेखनीय है कि भाव कम होने एवं टर्की, सीरिया के हालात अच्छे नहीं होने के कारण इस वर्ष भारतीय जीरे का निर्यात बढ़ रहा है आगामी दिनों में भी निर्यात अच्छा रहने की संभावना है। 
बिजाई के आंकड़े 
हाल ही में राजस्थान कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 28 नवम्बर- 2024 तक जीरा की बिजाई 6.6 लाख हेक्टेयर पर की जा चुकी है। जबकि गुजरात कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 25 नवम्बर तक राज्य में जीरा की बिजाई 57915 हेक्टेयर पर हुई है। सूत्रों का कहना है कि इस वर्ष  उत्पादक राज्यों में बिजाई 20/25 दिसम्बर तक जारी रहेगी। जबकि आमतौर पर बिजाई दिसम्बर के प्रथम सप्ताह तक होती थी। 
निर्यात में वृद्धि 
चालू सीजन के दौरान कीमतों में मन्दा रहने के कारण जीरा निर्यात में शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। उल्लेखनीय है कि विगत चार वर्षों से जीरा निर्यात में गिरावट दर्ज की जा रही थी लेकिन इस वर्ष जीरा निर्यात में वृद्धि दर्ज की जाएगी। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 के प्रथम छह माह अप्रैल-सितम्बर 2024 के दौरान जीरा का निर्यात 128505 टन का किया गया है जबकि गत वर्ष अप्रैल-सितम्बर 2023 में निर्यात 76969.88 टन का हुआ था। अक्टूबर - 2024 में जीरा निर्यात 17455 टन का रहा गत वर्ष अक्टूबर 2023 में निर्यात 7627 टन का हुआ था। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020-21 में जीरा निर्यात 298423 टन एवं वर्ष 2021-22 में 216971 टन का निर्यात किया गया। वर्ष 2022-23 में निर्यात 186509 टन एवं वर्ष 2023-24 में 165269 टन जीरा निर्यात हुआ।