साप्ताहिक समीक्षा-सरसों
19-Apr-2025 08:30 PM
सामान्य आवक एवं सरकारी खरीद के बावजूद सरसों में नरमी
नई दिल्ली। हालांकि प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में सरसों की औसत दैनिक आवक 10-12 लाख बोरी (50 किलो की प्रत्येक बोरी) से घटकर 5-6 लाख बोरी के सामान्य स्तर पर आ गई है और सरकारी एजेंसियों द्वारा किसानों से 5950 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूतनम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर इसकी अच्छी खरीद भी की जा रही है लेकिन इसके बावजूद अधिकांश मंडियों में 12-18 अप्रैल वाले सप्ताह के दौरान रबी सीजन की एक सबसे प्रमुख तिलहन फसल की कीमतों में 100-200 रुपए प्रति क्विंटल तक की नरमी दर्ज की गई। केवल गुजरात में भाव तेज रहा।
42% कंडीशन सरसों
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान 42 प्रतिशत कंडीशन वाली सरसों का भाव दिल्ली में 75 रुपए गिरकर 6125 रुपए प्रति क्विंटल तथा जयपुर में 50 रुपए फिसलकर 6325 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया। हरियाणा की अधिकांश मंडियों में सरसों का भाव पिछले स्तर पर बरकरार रहा। एक सरकारी प्रवक्ता के अनुसार हरियाणा में एमएसपी पर किसानों से लगभग 5 लाख टन सरसों की खरीद की जा चुकी है जबकि खरीद की प्रक्रिया अभी जारी है।
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के मुरैना, पोरसा एवं ग्वालियर में सरसों के दाम में 100-125 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई जिससे वहां इसका भाव गिरकर एमएसपी के काफी करीब आ गया है। वहां व्यापारियों एवं मिलर्स की मांग कुछ सुस्त देखी गई। उत्तर प्रदेश की हापुड़ मंडी में सरसों पुराने स्तर पर स्थिर रही लेकिन आगरा में 50 रुपए गिरकर 6675/6900 रुपए पर आ गई।
राजस्थान
सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में सरसों की कीमत में कुछ उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। वहां इसका भाव गंगानगर में 100 रुपए सुधरकर 5650/5700 रुपए प्रति क्विंटल हो गया मगर भरतपुर में 85 रुपए एवं टोंक में 100 रुपए प्रति क्विंटल नीचे आ गया।
सरसों तेल
सरसों तेल में मांग कमजोर रही जबकि मिलर्स के पास स्टॉक ज्यादा है। इसके फलस्वरूप एक्सपेलर एवं कच्ची घानी तेल के दाम में 10-20 रुपए प्रति 10 किलो की गिरावट दर्ज की गई। आगरा में कच्ची घानी सरसों तेल का दाम 40 रुपए नरम पड़कर 1360 रुपए प्रति 10 किलो रह गया। मुरैना में भी इसमें 20 रुपए की नरमी रही। वहां एक्सपेलर का दाम भी 20 रुपए नरम देखा गया।
आवक
प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में सरसों की आवक 12 अप्रैल को 5.25 लाख बोरी, 14 अप्रैल को 5 लाख बोरी, 15 अप्रैल को 7.25 लाख बोरी, 16 अप्रैल को 6.75 लाख बोरी, 17 अप्रैल को 6.50 लाख बोरी एवं 18 अप्रैल को 6.25 लाख बोरी दर्ज की गई।
रेपसीड मील
हालांकि 2023-24 के मुकाबले 2024-25 के वित्त वर्ष में रेपसीड मील के निर्यात में भारी गिरावट आ गई मगर अब चीन की बेहतर मांग के सहारे निर्यात में बढ़ोत्तरी की उम्मीद है।
