साप्ताहिक समीक्षा- सरसों
05-Jul-2025 07:12 PM
कम आवक एवं अच्छी लिवाली से सरसों का भाव तेज
नई दिल्ली। क्रशर्स-प्रोसेसर्स एवं व्यापारियों / स्टॉकिस्टों की मजबूत मांग रहने तथा मंडियों में आवक सामान्य से कम होने के कारण सरसों की कीमतों में अच्छी तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ है। सरसों तेल में भी अच्छी मांग है और खल का कारोबार सुधरने लगा है।
42% कंडीशन सरसों
28 जून- 4 जुलाई वाले सप्ताह के दौरान 42 प्रतिशत कंडीशन वाली सरसों का भाव दिल्ली में 100 रुपए सुधरकर 6750 रुपए प्रति क्विंटल तथा जयपुर में 150 रुपए बढ़कर 7100 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया।
सरसों
सामान्य औसत क्वालिटी वाली सरसों के दाम में भी 100-200 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ जबकि हरियाणा की सिरसा मंडी में यह 400 रुपए उछलकर 6600 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। राज्य की अन्य मंडियों में भी कीमत 150 रुपए तक बढ़ गई। मध्य प्रदेश की मंडियों- मुरैना, पोरसा एवं ग्वालियर में सरसों के दाम में 50 से 150 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी हुई।
उत्तर प्रदेश / राजस्थान
उत्तर प्रदेश की हापुड़ एंव आगरा मंडी में भी भाव 50-75 रुपए सुधर गए। सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में सरसों का भाव गंगानगर में 130 रुपए तथा कोटा में 50 रुपए नरम रहा जबकि भरतपुर, अलवर एवं बीकानेर सहित अन्य मंडियों में तेज रहा।
सरसों तेल
सरसों के भाव में तेजी का माहौल रहने से सरसों तेल की कीमतों में भी 40-50 रुपए प्रति 10 किलो तक का भारी इजाफा दर्ज किया गया। इसमें एक्सपेलर एवं कच्ची घानी- दोनों श्रेणी के तेल शामिल है। दिल्ली में एक्सपेलर का भाव 40 रुपए बढ़कर 1490 रुपए प्रति 10 किलो तथा चरखी दादरी में 42 रुपए बढ़कर 1507 रुपए प्रति 10 किलो हो गया। अधिकांश केन्द्रों में सरसों तेल की कीमत 150 रुपए प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई है। कोलकाता में तो कच्ची घानी सरसों तेल का भाव 80 रुपए उछलकर 1580 रुपए प्रति 10 किलो की ऊंचाई पर पहुंच गया। बीकानेर में एक्सपेलर 50 रुपए बढ़कर 1500 रुपए पर पहुंच गया।
आवक
राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में सरसों की आवक 28 जून को 3.75 लाख बोरी, 30 जून को 4.25 लाख बोरी, 1 जुलाई को 3.25 लाख बोरी, 2 जुलाई को 2.00 लाख बोरी, 3 जुलाई को 3.50 लाख बोरी एवं 4 जुलाई को 4 लाख बोरी दर्ज की गई जबकि प्रत्येक बोरी 50 किलो की होती है।
सरसों खल (डीओसी)
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान सरसों खल की कीमतों में कुछ नरमी रही क्योंकि कारोबार अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सका। सरसों डीओसी में सीमित कारोबार हुआ और भाव स्थिर बना रहा।
