प्रमुख मंडियों में धान की जोरदार आवक- चावल में मांग कमजोर
नई दिल्ली। पंजाब, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश जैसे शीर्ष बासमती उत्पादक राज्यों की प्रमुख मंडियों में धान की भारी आवक होने लगी है। इसी तरह छत्तीसगढ़ तथा दिल्ली में भी धान की अच्छी आपूर्ति हो रही है।
उत्पादन
हालांकि पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान बासमती धान के उत्पादन क्षेत्र में करीब एक लाख हेक्टेयर की गिरावट आने की संभावना है लेकिन जल्दी ही नई फसल की जोरदार कटाई-तैयारी शुरू होने की उम्मीद से बड़े-बड़े उत्पादकों एवं स्टॉकिस्टों ने अपना पिछला स्टॉक मंडियों में उतारना शुरू कर दिया है।
निर्यात
दूसरी ओर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही में बाधा पड़ने से भारतीय बासमती चावल निर्यातकों को कठिनाई हो रही है इसलिए मिलर्स / प्रोसेसर्स तथा निर्यातक मंडियों में धान की खरीद में सावधानी दिखा रहे हैं।
आवक
12-18 सितम्बर वाले सप्ताह के दौरान धान की दैनिक आवक बढ़ते हुए दिल्ली के नरेला में 20 हजार बोरी, छत्तीसगढ़ भाटपाड़ा में 5-6 हजार बोरी, राजिम में 4-5 हजार बोरी, पंजाब के अमृतसर में 1.50 लाख बोरी, तरन तारन में 90 हजार बोरी, फाजिल्का में 1500 बोरी, उत्तर प्रदेश के एटा में 800 बोरी, जहांगीराबाद में 15 हजार बोरी, शाहजहांपुर में 10 हजर बोरी, अलीगढ़ में 35 हजार बोरी, खैर में 40 हजार बोरी, हरियाणा के तरावड़ी में 35 हजार बोरी, टोहाना एवं गोहाना में 1500-1500 बोरी तथा पलवल में 1200 बोरी तक पहुंच गई। इसके अलावा कुछ अन्य मंडियों में भी धान की थोड़ी-बहुत आवक होने लगी है जो आगामी समय में बढ़ सकती है।
चावल
जहां तक चावल का सवाल है तो इसका कारोबार समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान कुछ सुस्त देखा गया। इसके फलस्वरूप कीमतों में 100-200 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट आ गई। हालांकि गैर बासमती चावल का निर्यात प्रदर्शन बेहतर चल रहा है लेकिन बासमती चावल का शिपमेंट उसके मुकाबले कम उत्साहवर्धक है।
भाव
अमृतसर में चावल का भाव नरम पड़ गया जबकि दिल्ली के नया बाजार में काफी हद तक स्थिरता देखी गई। उत्तराखंड की नगर मंडी में भी शांति रही। हरियाणा की बेंचमार्क करनाल मंडी में करोबारी सक्रियता के अभाव में चावल का दाम स्थिर रहा जबकि राजस्थान की बूंदी मंडी में सुगंधा चावल का मूल्य 300 रुपए प्रति क्विंटल घट गया।