साप्ताहिक समीक्षा-धान-चावल

30-Nov-2024 07:39 PM

आवक बढ़ने से धान में नरमी- निर्यातकों की मांग से चावल में सुधार  

नई दिल्ली। खरीफ कालीन धान की आवक धीरे-धीरे पीक पर पहुंचती जा रही है जबकि इसके अनुरूप लिवाली नहीं होने से कुछ मंडियों में कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। 21 से 27 नवम्बर वाले सप्ताह के दौरान दिल्ली की नरेला मंडी में 40 से 70 हजार बोरी तक धान की दैनिक आवक हुई और कीमतों में 50/100 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई। छत्तीसगढ़ की राजिम मंडी में 7 से 10 हजार बोरी की दैनिक आवक के बीच कीमतों में 50-60 रुपए की नरमी रही। 
पंजाब / अमृतसर 
पंजाब के अमृतसर में 1121 धान का भाव 275 रुपए घटकर 3600/4150 रुपए प्रति क्विंटल तथा 1509 का दाम 111 रुपए गिरकर 2800/3200 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। इस मंडी में रोजाना 25-30 हजार बोरी धान की आपूर्ति हुई। वहीं तरन तारन मंडी में 27 नवम्बर को 65 हजार बोरी धान पहुंचा। उत्तर प्रदेश के एटा में 10-15 हजार बोरी धान की दैनिक आपूर्ति हुई जबकि कीमत थोड़ी नरम रही। 
उत्तर प्रदेश 
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी, जहांगीराबाद, शाहजहांपुर, अलीगढ़, खैर तथा डिबई और हरियाणा के टोहाना, मध्य प्रदेश के डबरा एवं जबलपुर तथा राजस्थान के बूंदी एवं कोटा में भी नए धान की आपूर्ति बढ़ने लगी है। कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया लेकिन कहीं-कहीं धान की एक दो किस्मों के मूल्य में 500-700 रुपए प्रति क्विंटल तक की तेजी-मंदी दर्ज की गई। 
चावल 
जहां तक चावल का सवाल है तो इसकी खरीद में व्यापारियों एवं निर्यातकों की अच्छी दिलचस्पी देखी जा रही है। छत्तीसगढ़ के भाटापाड़ा में विष्णुभोग पुराना  चावल का भाव 100 रुपए सुधरकर 7300/7400 रुपए प्रति क्विंटल तथा अमृतसर में 1718 स्टीम चावल का दाम 350 रुपए बढ़कर 7150/7200 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। लेकिन बूंदी में 1121 बासमती चावल का मूल्य 300 रुपए की गिरावट के साथ 7600 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। हरियाणा की बेंचमार्क करनाल मंडी में आमतौर पर चावल के दाम में 100 से 300 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई मगर शरबती सेला का भाव 500 रुपए उछलकर 5400 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। दिल्ली के नया बाजार में 1509 सेला चावल का मूल्य 400 रुपए की गिरावट के साथ 5500/5600 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया। 
आवक 
नए माल की आवक में देर होने से चावल की कीमतों में कुछ मजबूती आई है। वैश्विक बाजार में भारतीय चावल की अच्छी मांग बनी हुई है और आगे भी बरकरार रहने की उम्मीद है।