साप्ताहिक समीक्षा-धान-चावल

20-Jun-2026 09:38 PM

होर्मुज खुलने की उम्मीद से धान-चावल का कारोबार बेहतर    

नई दिल्ली। आपूर्ति का ऑफ सीजन होने से देश की गिनी-चुनी मंडियों में ही बासमती तथा 'ए' ग्रेड गैर बासमती धान की थोड़ी-बहुत आवक हो रही है। ईरान-अमरीका के बीच युद्ध एवं तनाव की स्थिति रहने और होर्मुज स्ट्रेट का महापवूर्ण जल मार्ग व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही के लिए बंद रहने से भारत को पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में खासकर बासमती चावल का निर्यात करने में कठिनाई हो रही थी। लेकिन अब दोनों देशों के बीच युद्ध विराम तथा शांति समझौता होने से होर्मुज स्ट्रेट के खुलने की उम्मीद बढ़ गई है। इसके फलस्वरूप भारतीय मिलर्स / प्रोसेसर्स धान की खरीद में दिलचस्पी दिखने लगे हैं जबकि निर्यातक चावल की खरीद में अच्छी सक्रियता दिखा रहे हैं।
दिल्ली   
13-19 जून वाले सप्ताह के दौरान धान की आवक केवल नरेला, भाटापाड़ा, राजिम, शाहजहांपुर एवं बूंदी-कोटा के अलावा इक्का-दुक्का मंडियों तक ही सीमित रही। नरेला मंडी में 1000-2000 बोरी धान की दैनिक आवक के बीच कीमतों में लगभग स्थिरता बनी रही। भाटापाड़ा में रोजाना 5500-7500 बोरी के बीच धान आया लेकिन खरीदारी कुछ कम होने से भाव 100 रुपए प्रति क्विंटल नरम पड़ गया। दूसरी ओर राजिम मंडी में 8-10 हजार बोरी की भारी आवक होने के बावजूद बेहतर कारोबार होने से कीमतों में 50-60 रुपए प्रति क्विंटल का सुधार देखा गया। 
जहांगीराबाद 
जहांगीराबाद में 3-5 हजार बोरी तथा शाहजहांपुर में 1000 बोरी धान की दैनिक आवक हुई। शाहजहांपुर में भाव स्थिर रहा लेकिन जहांगीराबाद में 1509 धान का दाम 280 रुपए उछलकर 3651/3881 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। बूंदी मंडी में 2000 बोरी तथा कोटा में 500-700 बोरी धान रोजाना पहुंचा। बूंदी में कीमत 100-200 रुपए प्रति क्विंटल तेज रही। 
चावल 
जहां तक चावल का सवाल है तो पंजाब के अमृतसर, राजस्थान के बूंदी और दिल्ली के नया बाजार में शानदार कारोबार के कारण कुछ किस्मों एवं श्रेणियों के दाम में 400-500 रुपए प्रति क्विंटल तक की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई। समझा जाता है कि मानसून की सक्रियता बढ़ने से पूर्व निर्यातक स्टॉकिस्ट एवं सामान्य व्यापारी अपना स्टॉक बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।