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17-Oct-2026 11:56 AM
नई दिल्ली। हालांकि खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत भारतीय खाद्य निगम द्वारा बेचे जाने वाले गेहूं का न्यूनतम आरक्षित मूल्य (रिजर्व प्राइस) इस बार अपेक्षाकृत काफी ऊंचा नियत किया गया है लेकिन फिर भी इसकी खरीद में फ्लोर मिलर्स एवं प्रोसेसर्स द्वारा अच्छी दिलचस्पी दिखाई जा रही है। चालू वित्त वर्ष के लिए हुई पहली नीलामी के अंतर्गत खाद्य निगम द्वारा कुल 1.05 लाख टन गेहूं की बिक्री का ऑफर दिया गया जिसमें से 86,245 टन या 82 प्रतिशत की बिक्री हो गई। फ्लोर मिलर्स तथा प्रोसेसर्स के साथ-साथ खासकर बिस्कुट निर्माताओं को दीपावली से पूर्व गेहूं के स्टॉक की जरूरत है और इसलिए सरकारी अनाज की खरीद में उसकी अच्छी सक्रियता देखी गई।
देश के 20 से अधिक राज्यों में ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री के लिए ई-नीलामी आयोजित की गई थी और प्रमुख खपतकर्ता प्रांतों में इसकी भारी बिक्री भी हुई। इसमें पंजाब, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश जैसे राज्य भी शामिल हैं जो केन्द्रीय पूल में गेहूं का भारी योगदान देते हैं।
पूर्वी क्षेत्र के राज्यों में गेहूं की बिक्री का जो कोटा आवंटित किया गया था उसमें लगभग सम्पूर्ण भाग का उपयोग हो गया। इसमें उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, झारखंड एवं छत्तीसगढ़ जैसे प्रान्त शामिल हैं जहां गेहूं का उत्पादन बहुत कम होता है। दक्षिण भारत में गेहूं की पैदावार नहीं या नगण्य होती है। पंजाब में 20 हजार टन तथा हरियाणा में 9 हजार टन गेहूं की बिक्री का ऑफर दिया गया था और इसकी लगभग सम्पूर्ण मात्रा बिक गई। लेकिन उत्तर प्रदेश में 9000 टन के ऑफर के सापेक्ष 7125 टन की बिक्री संभव हो सकी।