सरकारी गोदामों में तीन वर्ष से पुराने चावल का विशाल स्टॉक मौजूद

29-Aug-2025 04:09 PM

नई दिल्ली। एक तरफ भारतीय खाद्य निगम के पास चावल का अत्यन्त विशाल स्टॉक मौजूद है तो दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का भाव घटकर पिछले अनेक वर्षों के निचले स्तर पर आ गया है। व्यापारियों का कहना है कि सरकारी गोदामों में तीन वर्ष से भी अधिक पुराने चावल का भारी स्टॉक पड़ा हुआ है जिसमें कच्चे (सफेद) चावल की मात्रा सेला चावल से बहुत अधिक है।  

खाद्य निगम के पास 379.70 लाख टन चावल तथा 213.50 लाख टन धान (जो 145 लाख टन चावल के समतुल्य है) का स्टॉक उपलब्ध है। यह स्टॉक इस समय का रिकॉर्ड स्तर है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा 2022-23 के मार्केटिंग सीजन में 684 लाख टन, 2023-24 में 719 लाख टन तथा 2024-25 के सीजन में 768.10 लाख टन धान की खरीद की गई थी। इससे निर्मित चावल का वितरण-विपणन विभिन्न स्कीमों के तहत किया गया मगर फिर भी सरकार के पास इसका भारी-भरकम स्टॉक बचा रहा। 

सितम्बर 2022 में खाद्य निगम के पास 244.60 लाख टन चावल तथा 161.60 लाख टन धान का स्टॉक मौजूद था। धान का यह स्टॉक करीब 108 लाख टन चावल के समतुल्य था।

इसी तरह सितम्बर 2023 में 232.80 लाख टन चावल एवं 160.70 लाख टन धान (108 लाख टन चावल के समतुल्य) का स्टॉक उपलब्ध था। सितम्बर 2024 में चावल की मात्रा 323 लाख टन एवं धान की मात्रा 148.20 लाख टन (99.20 लाख टन चावल के बराबर) दर्ज की गई। 

सरकारी गोदामों में मौजूद चावल के भंडारण एवं रख रखाव पर विशाल धनराशि खर्च होती है। इन गोदामों में पुराने चावल का भी अच्छा खासा स्टॉक उपलब्ध है। पिछले सीजन के दौरान धान की सरकारी खरीद 23,000 रुपए प्रति टन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की गई थी

जबकि इसके प्रसंस्करण (मिलिंग), भंडारण एवं ब्याज आदि खर्च को मिलाकर चावल की कुल आर्थिक लागत  35,000 रुपए प्रति टन पर पहुंच गई। पुराने चावल के भंडारण पर भी भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। 

इस चावल को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 81 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त में बांटा जा रहा है जबकि अन्य योजनाओं  के तहत भी रियायती मूल्य पर उपलब्ध करवाया जा रहा है। इससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ रहा है। खुले बाजार बिक्री योजना में इसकी बिक्री बहुत कम हो रही है।