सात कृषि जिंसों में वायदा कारोबार पर 31 जनवरी तक रोक

20-Dec-2024 04:05 PM

मुम्बई । स्टॉक एवं कॉमोडिटी मार्केट की नियामक संस्था- भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सात कृषि जिंसों में वायदा कारोबार पर लागू प्रतिबंध की समय सीमा को 31 जनवरी 2025 तक के लिए बढ़ा दिया है जबकि उद्योग-व्यापार क्षेत्र इसे हटाने की मांग कर रहा था।

इस बार अंतर यह है कि रोक की अवधि केवल एक माह के लिए बढ़ाई गई है जबकि पहले एक साल के लिए बढ़ाई जा रही थी। इसके निकट भविष्य में पाबंदी को हटाए जाने की उम्मीद जगी है। इसके तहत खासकर तिलहन-तेल से सम्बन्धित उत्पाद हैं जिसके लिए पहले से हो जोरदार लॉबिंग हो रही है। 

जिन सात कृषि उत्पाद या उत्पाद समूह में वायदा कारोबार पर दिसम्बर 2021 में पाबंदी लगाई गई थी उसमें गैर बासमती धान, गेहूं, चना, मूंग, सरसों एवं इसके उत्पाद, सोयाबीन एवं इसके उत्पाद (डेरिवेटिव्स) तथा क्रूड पाम तेल शामिल है।

प्रतिबंध की अवधि एक-एक साल बढ़ाकर 20 दिसम्बर 2024 तक नियत की गई थी। यह समय सीमा समाप्त होने से पूर्व ही सेब ने एक सर्कुलर जारी करके इसे 31 जनवरी 2025 तक बढ़ा दिया। 

दिसम्बर 2021 से ही उपरोक्त कृषि जिंसों में वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगा हुआ है। पहले गेहूं, सोयाबीन, क्रूड पाम तेल, मूंग तथा धान में वायदा कारोबार स्थगित किया गया और फिर चना तथा सरसों को भी इस सूची में शामिल कर लिया गया।

सोयाबीन का भाव घटकर सरकारी संमर्थन मूल्य से काफी नीचे आने से उत्पादक बेहद चिंतित और परेशान हैं। स्वयं सरकार को किसानों से समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड  मात्रा में सोयाबीन खरीदने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

सरकार ने क्रूड एवं रिफाइंड श्रेणी के खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में 20 प्रतिशत बिंदु की बढ़ोत्तरी की थी जिसका उद्देश्य घरेलू प्रभाग में तिलहनों और खासकर सोयाबीन का भाव ऊंचा उठाना था। लेकिन इस निर्णय का सकारात्मक असर शून्य रहा।

इसके तहत तिलहनों का दाम तो नहीं बढ़ा मगर महंगे आयात के कारण खाद्य तेलों का भाव जरूर ऊंचा हो गया। उद्योग समीक्षकों को उम्मीद है कि सरकार प्रतिबंधित सूचि से सोयाबीन को बाहर करने का निर्णय ले सकती है।