सोयाबीन एवं मूंगफली के उत्पादन में भारी बढ़ोत्तरी का अनुमान
30-May-2025 11:33 AM
नई दिल्ली। 2024-25 के सीजन में मौसम एवं वर्षा की हालत काफी हद तक तिलहन फसलों के लिए अनुकूल रही जिससे खासकर खरीफ सीजन में उत्पादन शानदार हुआ लेकिन रबी सीजन में सबसे प्रमुख तिलहन-सरसों की बिजाई कम हुई और फसल की हालत भी उत्साहवर्धक नहीं रही।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार 2023-24 सीजन के मुकाबले 2024-25 के सीजन में सोयाबीन का उत्पादन 130.60 लाख टन से 21.20 लाख टन उछलकर 151.80 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर तथा मूंगफली का उत्पादन 101.80 लाख टन से 17.20 लाख टन बढ़कर 119 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया।
ध्यान देने की बात है कि सोयाबीन का उत्पादन सिर्फ खरीफ सीजन में होता है जबकि मूंगफली की खेती खरीफ के साथ रबी एवं जायद सीजन में भी होती है।
दूसरी ओर रबी सीजन की सबसे प्रमुख तिलहन फसल- सरसों का उत्पादन 2023-24 सीजन के 132.60 लाख टन से 6.50 लाख टन घटकर 2024-25 के सीजन में 126.10 लाख टन पर अटक जाने का अनुमान लगाया गया है। फसल की कटाई-तैयारी हाल ही में समाप्त हुई है।
इसके अलावा देश में तिल, सूरजमुखी, अरंडी, नाइजरसीड, सैफ्लावर तथा अलसी जैसे अन्य तिलहनों का उत्पादन होता है। देश में खाद्य तेलों का विशाल आयात होता है क्योंकि तिलहनों का घरेलू उत्पादन पर्याप्त नहीं होता है।
सरकार ने 2025-26 के सीजन हेतु सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 436 रुपए बढ़ाकर 5328 रुपए प्रति क्विंटल, मूंगफली का समर्थन मूल्य 480 रुपए बढ़ाकर 7263 रुपए प्रति क्विंटल,
तिल का 579 रुपए बढ़ाकर 9846 रुपए प्रति क्विंटल, सूरजमुखी का 441 रुपए बढ़ाकर 7721 रुपए प्रति क्विंटल और नाइजरसीड का न्यूनतम समर्थन मूल्य 820 रुपए बढ़ाकर 9537 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
इससे किसानों को तिलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र बढ़ाने का अच्छा प्रोत्साहन मिल सकता है। 2024-25 के खरीफ मार्केटिंग सीजन में बाजार भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी नीचे आ जाने के कारण सरकार को रिकॉर्ड मात्रा में सोयाबीन एवं मूंगफली की खरीद करनी पड़ी थी जिसका स्टॉक अब भी उसके पास मौजूद है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसून की अच्छी बारिश होने लगी है।
