सोयाबीन के बिजाई क्षेत्र के सरकारी एवं सोपा के आंकड़ों में भारी अंतर

16-Sep-2025 08:22 PM

नई दिल्ली। खरीफ सीजन की एक प्रमुख तिलहन फसल-सोयाबीन की बिजाई का अभियान समाप्त होने के बाद अब क्षेत्रफल की जो तस्वीर उभर रही है उसके लिए केन्द्रीय कृषि मंत्रालय तथा इंदौर स्थित संस्था- सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के आंकड़ों में करीब 5 लाख हेक्टेयर का भारी अंतर देखा जा रहा है। वैसे दोनों में गत वर्ष के मुकाबले इस बार  सोयाबीन के रकबे में गिरावट आने का अनुमान लगाया है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र घटकर 120.43 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जो पिछले साल 129.57 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा था।

दूसरी ओर सोपा का मानना है कि गत वर्ष सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र 118.32 लाख हेक्टेयर रहा था जो इस बार गिरकर 115.66 लाख हेक्टेयर रह गया। 

मौजूदा खरीफ सीजन के लिए सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र सरकारी तौर पर मध्य प्रदेश में 51.20 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 49.65 लाख हेक्टेयर, राजस्थान में 9.83 लाख हेक्टेयर, कर्नाटक में 4.22 लाख हेक्टेयर, गुजरात में 2.78 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 1.45 लाख हेक्टेयर, छत्तीसगढ़ में 27 हजार हेक्टेयर तथा अन्य राज्यों में 1.04 लाख हेक्टेयर आंका गया है।

दूसरी ओर सोपा ने मध्य प्रदेश में 48.64 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 48.20 लाख हेक्टेयर तथा राजस्थान में 9.07 लाख हेक्टेयर माना है जबकि शेष राज्यों में रकबा सरकारी आंकड़े के बराबर ही है। 

सोपा के अनुसार शीर्ष उत्पादक राज्यों में सोयाबीन फसल की हालत अलग-अलग है। मध्य प्रदेश में 6 प्रतिशत फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई जबकि 15 प्रतिशत में इसकी हालत कमजोर, 70 प्रतिशत में सामान्य तथा 9 प्रतिशत में उत्साहवर्धक है।

इसी तरह महाराष्ट्र में सोयाबीन की 8 प्रतिशत फसल पूरी तरह क्षतिग्रस्त, 11 प्रतिशत कमजोर, 60 प्रतिशत सामान्य और 21 प्रतिशत बेहतरीन हालत में है।

राजस्थान में 8 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई जबकि 44 प्रतिशत की हालत बेहद कमजोर है। शेष 38 प्रतिशत में फसल सामान्य तथा 10 प्रतिशत क्षेत्र में उत्साहवर्धक स्थिति में आंकी गई है।