तिल और सोयाबीन की कम बिजाई होने से तिलहन फसलों का रकबा घटा

09-Sep-2025 03:58 PM

नई दिल्ली। हालांकि पिछले साल की तुलना में इस बार अरंडी का बिजाई क्षेत्र बढ़ा है और मूंगफली तथा नाइजर सीड के रकबे में भी मामूली सुधार आया है मगर सोयाबीन, तिल तथा सूरजमुखी के क्षेत्रफल में गिरावट आई है जिससे खरीफ कालीन तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से काफी पीछे रह गया। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान 5 सितम्बर तक राष्ट्रीय स्तर पर तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 192.21 लाख हेक्टेयर से 5.23 लाख हेक्टेयर घटकर 186.98 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।

इसके तहत सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 126.04 लाख हेक्टेयर से 5.72 लाख हेक्टेयर लुढ़ककर 120.32 लाख हेक्टेयर तिल का बिजाई क्षेत्र 10.62 लाख हेक्टेयर से गिरकर 10.14 लाख हेक्टेयर तथा सूरजमुखी का क्षेत्रफल 71 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 64 हजार हेक्टेयर पर अटक गया। 

दूसरी ओर समीक्षाधीन अवधि के दौरान मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 47.49 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 47.53 लाख हेक्टेयर, नाइजर सीड का रकबा 60 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 66 हजार हेक्टेयर और अरंडी का क्षेत्रफल 6.69 लाख हेक्टेयर से उछलकर 7.64 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है।

ध्यान देने की बात है कि अरंडी को एक अखाद्य या औद्योगिक श्रेणी का तिलहन माना जाता है जबकि नाइजर सीड का उपयोग मुख्यत: पक्षी दाना (आहार) के तौर पर किया जाता है। 

सोयाबीन के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट आने की आशंका पहले से ही व्यक्त की जा रही थी क्योंकि इसका थोक मंडी भाव पूरे सीजन के दौरान सरकारी समर्थन मूल्य से नीचे रहा और किसानों को आकर्षक आमदनी हासिल नहीं हुई।

हालांकि सरकार द्वारा 2024-25 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड मात्रा में सोयाबीन की खरीद की गई मगर शेष बचे स्टॉक को बेचने में उत्पादकों को काफी संघर्ष करना पड़ा। तीनों शीर्ष उत्पादक प्रांतों- मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं राजस्थान में इस बार सोयाबीन के बिजाई क्षेत्र में कमी आने की सूचना मिल रही है।