तिलहन फसलों का रकबा गत वर्ष से करीब 7 लाख हेक्टेयर आगे

12-Aug-2025 10:29 AM

नई दिल्ली। खरीफ सीजन की तीनों प्रमुख तिलहन फसलों- सोयाबीन, मूंगफली एवं तिल की बिजाई गत वर्ष से पीछे चल रही है जिससे तिलहन फसलों का कुल रकबा करीब 7 लाख हेक्टेयर घट गया है।

इससे खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के सरकारी प्रयासों को धक्का लग सकता है। हालांकि सरकार द्वारा उपरोक्त तीनों दलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी बढ़ोत्तरी की गई है और पिछले सीजन में सोयाबीन तथा मूंगफली की रिकॉर्ड सरकारी खरीद भी हुई थी

लेकिन फिर भी इसकी खेती में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घट गया है। इसका एक कारण बाजार भाव का नीचे रहना और दूसरा कारण मक्का की खेती में किसानों की दिलचस्पी बढ़ना माना जा रहा है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान खरीफ सीजन में 8 अगस्त 2025 तक राष्ट्रीय स्तर पर तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र घटकर 175.61 लाख हेक्टेयर रह गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 182.43 लाख हेक्टेयर से 6.82 लाख हेक्टेयर कम है।

इसके तहत सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 124.24 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 119.51 लाख हेक्टेयर, मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 45.06 लाख हेक्टेयर से घटकर 43.23 लाख हेक्टेयर तथा तिल का क्षेत्रफल 9.81 लाख हेक्टेयर से गिरकर 8.89 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। इसके साथ-साथ सूरजमुखी एवं नाइजर सीड का रकबा भी गत वर्ष से पीछे चल रहा है। 

उल्लेखनीय है कि मौजूदा खरीफ सीजन के लिए तिलहन फसलों का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 194.63 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि वास्तविक रकबा अभी उससे 19 लाख हेक्टेयर पीछे है।

अरंडी को छोड़कर अन्य तिलहनों की बिजाई अंतिम चरण में पहुंच गई है। वैसे सोयाबीन के थोक मंडी भाव में हाल के सप्ताहों में अच्छी तेजी आई है लेकिन इसकी बिजाई का आदर्श समय लगभग समाप्त हो जाने से इसके क्षेत्रफल में ज्यादा सुधार आना मुश्किल लगता है।

सोयाबीन का सामान्य औसत क्षेत्रफल 127.19 लाख हेक्टेयर तथा मूंगफली का 45.10 लाख हेक्टेयर नियत हुआ है। राजस्थान सहित कुछ अन्य प्रांतों में तिलहनों की बिजाई घटी है। वैसे कुछ इलाकों में बिजाई की प्रक्रिया अभी जारी है।