तुवर का भाव घटने से उत्पादकों में असंतोष

07-Feb-2025 12:02 PM

मुम्बई । घरेलू प्रभाग में नई फसल की जोरदार आवक के बीच केन्द्र सरकार ने अरहर (तुवर) के शुल्क मुक्त आयात की समयसीमा को एक और साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक निर्धारित कर दिया है जिससे स्वदेशी उत्पादकों में गहरा असंतोष है।

वर्ष 2024 में रिकॉर्ड आयात होने के कारण देश में पहले से ही तुवर का भारी-भरकम स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति तथा उपलब्धता की अत्यन्त सुगम स्थिति के कारण इसका भाव घटकर अनेक मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (7550 रुपए प्रति क्विंटल) से नीचे आ गया है। 

तुवर उत्पादकों को अपनी उपज का लाभप्रद मूल्य नहीं मिल रहा है इसलिए वे अपने स्टॉक को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।

सरकार का इरादा आम उपभोक्ताओं को उचित दाम पर दाल-दलहन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का है जो सैद्धांतिक रूप से गलत नहीं है परन्तु यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं। उपभोक्ताओं के साथ-साथ उत्पादकों के हितों का ध्यान रखना भी सरकार का कर्तव्य है।

यदि आयात पर विशेष जोर दिया गया और किसानों को लाभप्रद वापसी हासिल नहीं हुई तो तुवर की खेती के प्रति उसका उत्साह एवं आकर्षण घट सकता है।

जब देश में तुवर का अभाव था और दाम बढ़कर शीर्ष स्तर पर पहुंच गया था तब इसका शुल्क मुक्त आयात आवश्यक माना गया लेकिन अब स्थिति बदल गई है।

पिछले साल भारतीय किसानों को तुवर का भाव 12,000   रुपए प्रति क्विंटल तक प्राप्त हुआ था मगर अब थोक मंडी मूल्य घटकर 7000 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास रह गया है।

इससे किसानों का चिंतित एवं परेशान होना स्वाभाविक ही है। तुवर का आयात आगामी महीनों में तेजी से बढ़ने की संभावना है।