तुवर के बिजाई क्षेत्र तथा उत्पादन पर विश्लेषकों की राय में अंतर

30-May-2025 03:38 PM

मुम्बई। पिछले साल के मुकाबले चालू वर्ष के दौरान तुवर के बिजाई क्षेत्र तथा उत्पादन के संभावित परिदृश्य के बारे में उद्योग- व्यापार क्षेत्र के विश्लेषक अलग-अलग अनुमान व्यक्त कर रहे हैं।

कुछ समीक्षकों का मानना है कि तुवर के क्षेत्रफल एवं उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी होगी जबकि कुछ अन्य विश्लेषक इसमें गिरावट आने की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। 

अरहर (तुवर) के खरीफ सीजन का सबसे प्रमुख दलहन माना जाता है। इसका रकबा अन्य दलहनों से ज्यादा एवं उत्पादन ऊंचा रहता है। 2024-25 के खरीफ सीजन में इसका बिजाई क्षेत्र बढ़कर 43 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो 2023-24 सीजन के क्षेत्रफल 41 लाख हेक्टेयर से 2 लाख हेक्टेयर ज्यादा था

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने इसी अवधि में तुवर का घरेलू उत्पादन 34.20 लाख टन से 1.40 लाख टन बढ़कर 35.60 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान लगाया है जबकि उद्योग-व्यापार क्षेत्र ने वास्तविक उत्पादन इससे कुछ अधिक होने की संभावना व्यक्त की है। 

कुछ व्यापार विश्लेषकों ने 2025-26 के खरीफ सीजन के दौरान तुवर के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होने का अनुमान लगाया है क्योंकि एक तो सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 7550 रुपए प्रति क्विंटल से 450 रुपए बढ़ाकर 8000 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है

और तुवर की शत प्रतिशत खरीद करने की प्रतिबद्धता दोहराई है और दूसरे, इस वर्ष मानसून की बारिश भी अच्छी होने की उम्मीद है। इसके अलावा तुवर की अच्छी क्वालिटी के बीज का स्टॉक भी मौजूद है। 

एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एन्ड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के सचिव का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी बढ़ोत्तरी होने से किसानों को तुवर का उत्पादन बढ़ाने का अच्छा प्रोत्साहन मिल सकता है।

सरकार पहले ही कह चुकी है कि वह समर्थन मूल्य पर किसानों से तुवर का सम्पूर्ण स्टॉक खरीदने के लिए तैयार हैं। किसान खाद-बीज पर अच्छा निवेश कर सकते हैं।

महाराष्ट्र के अनेक किसान अब चारु किस्म के तुवर बीज की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं जिसकी उपज दर मारुती और पिंक किस्मों से बेहतर होती है।

वैसे भी तुवर के बीजों की अभी भारी मांग बनी हुई है। सचिव के अनुसार 2025-26 के सीजन में तुवर का उत्पादन 35-40 लाख टन के बीच रह सकता है।