त्यौहारी सीजन में सुधर सकता है चीनी का भाव

04-Jul-2025 11:44 AM

नई दिल्ली। स्वदेशी उद्योग के पास 30 सितम्बर 2024 की 79 लाख टन से अधिक चीनी का विशाल स्टॉक मौजूद था जबकि 30 सितम्बर 2025 को वर्तमान मार्केटिंग सीजन की समाप्ति पर यह घटकर  47 लाख टन के करीब रह जाने की संभावना है।

अक्टूबर के त्यौहारी माह के लिए घरेलू बाजार में बिक्री हेतु 23-24 लाख टन चीनी का फ्री सेल कोटा जारी हो सकता है जिससे 1 नवम्बर 2025 को उद्योग के पास महज इतना ही स्टॉक बच जाएगा जिसे नवम्बर माह के लिए जारी किया जा सकता है। इस तरह सैधान्तिक रूप से नवम्बर के अंत तक उद्योग के पास चीनी का पुराना स्टॉक लगभग समाप्त हो जाएगा। 

लेकिन इस बीच अक्टूबर से गन्ना की क्रशिंग एवं चीनी के उत्पादन का नया मार्केटिंग सीजन आरंभ हो जाएगा। आमतौर पर इसकी प्रक्रिया मध्य अक्टूबर के बाद ही जोर पकड़ती है जबकि नवम्बर से चीनी का उत्पादन तेजी से बढ़ने लगता है।

पिछले साल अक्टूबर-नवम्बर के दो महीनों में 17.90 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था और इसका पिछला बकाया स्टॉक भी मौजूद था इसलिए आपूर्ति का कोई संकट उत्पन्न नहीं हुआ। लेकिन चालू वर्ष के दौरान समस्या उत्पन्न हो सकती है क्योंकि मिलों के गोदाम  खाली होंगे।

इसे देखते हुए अक्टूबर-नवम्बर 2025 में कम से कम 30-35 लाख टन चीनी का घरेलू उत्पादन होना आवश्यक है ताकि दिसम्बर माह के लिए फ्री सेल कोटा जारी करने में सरकार को कोई कठिनाई न हो।

इसके लिए यह जरुरी है कि इस बार अक्टूबर में गन्ना की क्रशिंग जल्दी से जल्दी आरंभ हो और अधिक से अधिक संख्या में चीनी मिलें क्रियाशील हो जाएं। 

महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में गन्ना का क्षेत्रफल गत वर्ष से आगे निकल गया है और अब सारा दारोमदार मानसून के ऊपर है।

यदि जुलाई-अगस्त के दौरान इन प्रांतों में अच्छी वर्षा हुई और फसल पर रोगों-कीड़ों का प्रकोप नहीं रहा तो गन्ना की पैदावार में अच्छी बढ़ोत्तरी हो सकती है और तदनुरूप चीनी का उत्पादन सुधर सकता है।

पिछले साल इन दोनों प्रांतों में अगस्त से अक्टूबर तक मौसम प्रतिकूल रहा था जिससे 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में वहां चीनी के उत्पादन में जोरदार  गिरावट आ गई।

उत्तर प्रदेश में भी चीनी का काफी कम उत्पादन हुआ फिर भी महाराष्ट्र की तुलना में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा। इस बार मौसम कैसा रहता है यह देखना आवश्यक होगा। 

मांग एवं आपूर्ति के समीकरण में जटिलता बढ़ना निश्चित लगता है जिससे चीनी का भाव खासकर त्यौहारी महीनों में मानसून रहने की उम्मीद है।

सरकार चीनी के दाम को नियंत्रित करने का हर संभव प्रयास अवश्य करेगी लेकिन जानकारों का मानना है कि उसके पास सीमित विकल्प उपलब्ध रहेगा।