थोक बाजार भाव घटने के बावजूद दाल-दलहनों का खुदरा मूल्य ऊंचे स्तर पर बरकरार
28-Feb-2025 06:14 PM
मुम्बई। हालांकि पिछले दो माह के दौरान चना तथा तुवर के थोक मंडी भाव में करीब 25 प्रतिशत की भारी गिरावट आ चुकी है और इसका दाम कहीं-कहीं घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी नीचे आ गया है लेकिन खुदरा बाजार में इसकी दालों की कीमत अब भी काफी ऊंचे स्तर पर बरकरार है।
इससे आम उपभोक्ताओं को थोक मंडी भाव में आई गिरावट का कोई खास फायदा नहीं मिल रहा है। विदेशों से शुल्क मुक्त दलहनों का रिकॉर्ड आयात होने तथा घरेलू फसल की आवक शुरू हो जाने से कीमतों पर दबाव बढ़ा है। खुदरा बाजार में चना दाल का भाव केवल 4.3 प्रतिशत एवं तुवर दाल का दाम 12 प्रतिशत नीचे आया है।
दलहनों के कुल घरेलू उत्पादन में 50 प्रतिशत का योगदान देने वाले चना की कीमतों में पिछले दो महीनों के दौरान करीब 25 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है।
पीली मटर एवं देसी चना का विशाल आयात इसके लिए जिम्मेदार है। कुछ क्षेत्रों में नए चने की आवक भी जोर पकड़ने लगी है जबकि तुवर की आपूर्ति भी बढ़ने लगी है।
लेकिन खुदरा बाजार पर इसके अनुरूप असर नहीं देखा जा रहा है। उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि अखिल भारतीय स्तर पर 26 दिसम्बर 2024 से 26 फरवरी 2025 के दौरान चना दाल के औसत खुदरा मूल्य में केवल 4.3 प्रतिशत की कमी आई जबकि तुवर दाल का दाम 12 प्रतिशत नीचे आया।
इसी तरह पिछले दो-तीन महीनों के दौरान मसूर एवं मूंग जैसे दलहनों के थोक मूल्य में भी 10-15 प्रतिशत की गिरावट आई है लेकिन खुदरा कीमतों में महज 1 प्रतिशत की ही कमी देखी गई।
इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के मुताबिक शीर्ष स्तर की तुलना में अधिकांश दलहनों का थोक बाजार भाव 10 से 25 प्रतिशत तक घटा है और इसके अनुरूप खुदरा मूल्य में भी कमी आनी चाहिए थी लेकिन अभी तक ऐसा नहीं देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र की लगभग तमाम मंडियों में चना का भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आ गया है। ऑल इंडिया दाल मिलर्स एसोसिएशन का कहना है कि वर्ष 2024 के दौरान विदेशों से पीली मटर,
चना एवं तुवर का विशाल आयात होने से घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बहुत बढ़ गई जिससे कीमतों में नरमी का माहौल बन गया। तुवर का शुल्क मुक्त आयात आगे भी जारी रहेगा।
