दक्षिण भारत से आगे बढ़कर महाराष्ट्र में पहुंचा मानसून
27-May-2025 12:47 PM
तिरुअनन्तपुरम। दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार न केवल नियत तिथि से पहले आ गया बल्कि अच्छी रफ्तार के साथ आगे भी बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून 24 मई को ही केरल पहुंच गया जबकि पूर्वोत्तर क्षेत्र में 19 मई को पहुंचा था।
इस तरह 1 जून की नियत तिथि की तुलना में मानसून केरल में 8 दिन पहले और पूर्वोत्तर राज्यों में 12 दिन पहले पहुंच गया। इससे पूर्व वर्ष 2009 में यह 23 मई को आया था।
मानसून की तीव्रता, सघनता एवं गतिशीलता बढ़ाने के लिए तमाम अनुकूल परिस्थितियां मौजूद है जिसके सहारे यह आगे बढ़ते हुए अब महाराष्ट्र में पहुंच गया है और वहां कई इलाकों में मूसलाधार बारिश हो रही है।
इसके फलस्वरूप अनेक जिलों में खेतों में पानी भर गया है जिससे फसलों को नुकसान होने की संभावना व्यक्त की गई है। कर्नाटक में भी बारिश का दौर जारी है।
खरीफ फसलों की बिजाई जल्दी शुरू करने में इससे सहायता मिल सकती है। महाराष्ट्र में तूफानी बारिश की आशंका है। मौसम विभाग ने समुद्र में 15 फीट तक ऊंची लहरें उठने की संभावना जताई है और अछुआरों समेत अन्य लोगों को समंदर से दूर रहने का सुझाव दिया है।
वहां हवा की रफ्तार काफी तेज रह सकती है। अरब सागर का मानसून दक्षिणी एवं पश्चिमी राज्यों में सक्रिय है जबकि बंगाल की खाड़ी का मानसून पूर्वोत्तर राज्यों को बारिश की सौगात दे रहा है।
अच्छी बारिश के कारण किसानों को खासकर धान की रोपाई जल्दी शुरू करने में आसानी हो रही है। आरंभिक संकेतों से प्रतीत होता है कि इस बार मानसून की गति और तीव्रता बेहतर रहेगी और मध्य जून तक यह देश के अधिकांश भागों में पहुंच सकता है।
केरल, तमिलनाडु, पांडिचेरी, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र तथा गोवा जैसे राज्यों में पिछले 7-8 दिनों से रुक-रूककर बारिश हो रही है और मानसून-पूर्व की वर्षा का मानसूनी बारिश में विलय हो गया।
यह देखना दिलचस्प होगा कि महाराष्ट्र से आगे गुजरात तथा मध्य प्रदेश की ओर बढ़ते समय इसकी गतिशीलता कैसी रहती है। मध्य प्रदेश वाला मानसून का सिरा उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं दिल्ली तक पहुंच सकता है जबकि गुजरात वाला छोर राजस्थान सहित अन्य निकटवर्ती प्रांतों में पहुंचेगा।
पूर्वोत्तर क्षेत्र का ट्रफ बंगाल, बिहार, झारखंड एवं उड़ीसा में सक्रिय हो सकता है। वर्षा का समान वितरण होना आवश्यक है ताकि सभी राज्यों में खरीफ फसलों की अच्छी खेती सुनिश्चित हो सके।
