दक्षिण-पश्चिम मानसून पर रेमल तूफान का प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना नहीं

28-May-2024 01:01 PM

नई दिल्ली । भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का मानना है कि बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न रेमल नामक समुद्री चक्रवाती तूफान पश्चिम बंगाल सहित कुछ अन्य राज्यों में अपना असर दिखाने के बाद अब कमजोर पड़ गया है और इसलिए यह दक्षिण-पश्चिम मानसून को प्रभावित नहीं करेगा।

आईएमडी ने 31 मई को केरल तट पर मानसून के पहुंचने के अपने अनुमान को बरकरार रखते हुए देश में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है। 

मौसम विभाग के मुताबिक इस रेमल तूफान की वजह से भारत में मानसून के आगमन में कोई विलम्ब होने की संभावना नहीं है। मानसून सही समय पर आएगा और देश में दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के सापेक्ष 106 प्रतिशत बारिश होगी। जून में सामान्य वर्षा होने की उम्मीद है जो 166.9 मि०मी० के एलपीए का 92-108 प्रतिशत है। 

रेमल तूफान बंगाल और बांग्ला देश में काफी सक्रिय रहा जिससे जान-माल का नुकसान हुआ। अब इसकी तीव्रता कम हो गई है।

मौसम विभाग के मुताबिक देश के मध्यवर्ती एवं दक्षिणी प्रायद्वीपीय भाग में एलपीए की तुलना में 106 प्रतिशत, पश्चिमोत्तर राज्यों में 108 प्रतिशत तथा पूर्वोत्तर भारत में 94 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान है। ज्ञात हो कि इन प्रांतों में खरीफ फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। 

मानसून के कोर जोन में देश का अधिकांश कृषि उत्पादक क्षेत्र शामिल हैं और वहां एलपीए के सापेक्ष 106 प्रतिशत बारिश होने की प्रबल संभावना है।

इस कोर जोन में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड और तेलंगाना आदि शामिल है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं राजस्थान सहित अन्य प्रांतों में खरीफ सीजन के दौरान दलहन-तिलहन फसलों का भी भारी उत्पादन होता है।

पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत में मानसून की बारिश जून में कम होगी मगर जुलाई-अगस्त में इसकी भरपाई हो सकती है।